अदालत ने धनशोधन मामले में फोर्टिस हेल्थकेयर के पूर्व प्रवर्तक की अंतरिम जमानत याचिका खारिज की

नयी दिल्ली, शहर की एक अदालत ने धनशोधन के एक मामले में फोर्टिस हेल्थकेयर के पूर्व प्रवर्तक मलविंदर मोहन सिंह की अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

आरोपी ने तिहाड़ जेल में कोविड-19 संक्रमण होने की आशंका जताते हुए अंतरिम जमानत याचिका दायर की थी।

अतिरिक्त सत्र न्ययाधीश संदीप यादव ने सिंह की याचिका खारिज कर दी। सिंह इस समय रेलीगेयर फिनवेस्ट लिमिटेड (आरएफएल) में धन के कथित हेरफेर से जुड़े एक मामले में जेल में बंद हैं।

आरोपी ने अपनी याचिका में यह कहते हुए दो महीने के लिए अंतरिम जमानत पर रिहा करने का अनुरोध किया था कि उसे 25 अप्रैल से तेज बुखार और बदन दर्द है।

सिंह ने कहा था कि तिहाड़ की जेल संख्या आठ-नौ में जहां वह बंद हैं, कई लोग कोविड-19 से संक्रमित हुए हैं और इसलिए उन्हें बीमारी होने की पूरी आशंका है। उन्हें उच्च रक्तचाप से जुड़ी तकलीफें भी हैं जिनसे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो गयी है।

लेकिन अदालत ने जेल प्राधिकरण की 29 अप्रैल की रिपोर्ट का हवाला देते हुए सिंह की याचिका खारिज कर दी जिसके अनुसार उनकी स्वास्थ्य दशा स्थिर है और उन्हें डॉक्टर की बतायी गयी सभी दवाएं जेल की डिस्पेंसरी से ही उपलब्ध करायी जा रही हैं।

न्यायाधीश ने 30 अप्रैल के अपने आदेश में कहा, “रिपोर्ट को ध्यान से पढ़ने पर पता चलता है कि याचिकाकर्ता को ऐसी कोई बीमारी नहीं है जिसका तिहाड़ जेल में इलाज न किया जा सके।”

अदालत ने साथ ही जेल के अधीक्षक को सिंह की कोविड-19 जांच कराने का निर्देश दिया और संक्रमण होने की स्थिति में हिरासत में किसी अस्पताल में इलाज कराने को कहा।

क्रेडिट : पेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
फोटो क्रेडिट : Wikimedia commons

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