असम के मुख्यमंत्री ने भारत में एमनेस्टी इंटरनेशनल की गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग की

गुवाहाटी, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने पेगासस जासूसी विवाद मामले में मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल की कथित भूमिका के चलते भारत में उसकी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने की मंगलवार को मांग की।

भाजपा नेता ने दावा किया कि यह पूरा मामला नरेन्द्र मोदी की अगुवाई वाली केन्द्र सरकार की क्षवि खराब करने की अंतरराष्ट्रीय साजिश है।

उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा,‘‘ एमनेस्टी इंटरनेशनल सहित दुनियाभर में विभिन्न वामपंथी संगठन, साजिश का हिस्सा हैं। यह स्पष्ट है कि वे भारत के लोकतंत्र को बदनाम करना चाहते हैं। मैं एमनेस्टी इंटरनेशनल की भारत में गतिविधियों पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग करता हूं।’’

सरमा ने कहा कि पहले भी साक्ष्य थे, लेकिन इस हालिया घटना से अब यह स्पष्ट हो गया है कि एमनेस्टी भारत के लोकतांत्रिक ताने बाने को बदनाम करने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है।

उन्होंने वाशिंगटन पोस्ट जैसे समाचार पत्र की आलोचना करते हुए कहा वह इस बारे में जानकारी नहीं देता कि किस राज्य में कितने लोगों की मौत कोरोना वायरस संक्रमण से हो रही या अमेरिका कैसे संक्रमण के मामले से निपट रहा है, लेकिन उसे इस बारे में ज्यादा दिलचस्पी है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी क्या कर रहे हैं।

सरमा ने इस मामले के सामने आने के वक्त पर प्रश्न उठाते हुए कहा,‘‘ जब भी भारत किसी उपलब्धि के नजदीक पहुंचता है तत्काल देश के बाहर और अंदर अंतरराष्ट्रीय साजिश प्रारंभ हो जाती है। ’’

उन्होंने कहा ,‘‘कांग्रेस नेता राहुल गांधी पुलिस में शिकायत करके फॉरेंसिक विशेषज्ञों से अपने मोबाइल की जांच करा सकते थे,लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया गया।’’

गौरतलब है कि यह विवाद उस वक्त पैदा हुआ जब एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठन ने खुलासा किया कि इजराइली जासूसी सॉफ्टवेयर पेगासस के जरिये भारत के दो केंद्रीय मंत्रियों, 40 से अधिक पत्रकारों, विपक्ष के तीन नेताओं और एक मौजूदा न्यायाधीश सहित बड़ी संख्या में कारोबारियों और अधिकार कार्यकर्ताओं के 300 से अधिक मोबाइल नंबर हो सकता है कि हैक किए गए हों।

क्रेडिट : पेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
फोटो क्रेडिट : Wikimedia commons

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