उच्च न्यायालय ने ईडी से कहा : याचिका की सुनवाई होने तक महबूबा पर पेश होने का दबाव नहीं बनाएं

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय से कहा कि जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती पर धनशोधन मामले में व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए 18 मार्च तक दबाव नहीं बनाया जाए, जब अदालत उनकी याचिका पर सुनवाई करेगी। महबूबा की बेटी ने यह जानकारी दी।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंबानी की खंडपीठ के समक्ष यह मामला सुनवाई के लिए आया। अदालत ने ईडी से कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री पर 15 मार्च को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए दबाव नहीं बनाएं। इस मामले में अब 18 मार्च को आगे सुनवाई होगी।
पीडीपी नेता की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने कहा कि महबूबा ने 15 मार्च को ईडी के समक्ष पेश होने की वैधता को चुनौती दी थी। उन्होंने कहा कि याचिका में अदालत से ईडी का समन रद्द करने की गुजारिश की गयी है।
धनशोधन निवारण कानून के तहत समन जारी किए गए थे लेकिन नोटिस में इस बात का जिक्र नहीं था कि उन्हें किस मामले में उपस्थित होना है।
उच्च न्यायालय में दाखिल याचिका में महबूबा ने कहा कि उन्हें यह भी नहीं सूचित किया गया कि उन्हें आरोपी के तौर पर समन किया गया है या गवाह के तौर पर।
याचिका में कहा गया, ‘‘याचिकाकर्ता की न तो जांच की जा रही है और जानकारी के मुताबिक किसी मामले में वह आरोपी भी नहीं हैं।’’
याचिका में उन्होंने आरोप लगाए कि अनुच्छेद 370 समाप्त करने और एहतियातन हिरासत से रिहा करने के बाद ‘‘उनके, उनके परिचितों और पुराने पारिवारिक दोस्तों के खिलाफ कई शत्रुतापूर्ण कार्य किए गए हैं और इन सभी को ईडी की तरफ से समन जारी किया गया है…।’’
जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करने के बाद महबूबा (60) को हिरासत में लिया गया था और उसके एक वर्ष बाद उन्हें रिहा किया गया। ईडी ने उन्हें राष्ट्रीय राजधानी स्थित अपने मुख्यालय में पेश होने के लिए नोटिस जारी किया है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने पीएमएलए की धारा 50 को भी चुनौती दी जिसके तहत उन्हें समन किया गया और कहा कि यह धारा, अनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष समानता या भारत के अंदर कानून का बराबर संरक्षण) और अनुच्छेद 21 (किसी भी व्यक्ति को कानून के प्रावधानों के अतिरिक्त जीवन या वैयक्तिक स्वतंत्रता के अधिकार से वंचित नहीं किया जाएगा) का उल्लंघन है।

क्रेडिट : पेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
फोटो क्रेडिट : Wikimedia commons

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