कांग्रेस ने भारत में अमेरिकी राजदूत के तौर पर गार्सेटी के नाम को दी मंजूरी

वाशिंगटन, कांग्रेस की एक अहम समिति ने भारत में अमेरिका के राजदूत के तौर पर लॉस एंजिलिस के मेयर एरिक एम गार्सेटी के नामांकन को मंजूरी दी है।

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने पिछले साल जुलाई में भारत में राजदूत के तौर पर गार्सेटी को नामांकित किया था। अगर सीनेट उनके नाम पर मुहर लगा देती है तो 50 वर्षीय गार्सेटी पूर्ववर्ती डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के दौरान भारत में अमेरिका के राजदूत रहे केनेथ जस्टर का स्थान लेंगे।

गार्सेटी के अलावा सीनेट की शक्तिशाली विदेशी संबंध समिति ने बुधवार को 11 अन्य राजदूतों के नामांकन को मंजूरी दी। इनमें जर्मनी में अमेरिका के राजदूत के तौर पर एमी गुटमैन, पाकिस्तान में डोनाल्ड आर्मिन ब्लोम तथा होली सी में जोए डोनेली के नाम शामिल हैं। अब इन नामों को अंतिम मंजूरी के लिए सीनेट के पटल पर रखा जाएगा।

सीनेट की विदेश संबंधों की समिति के अध्यक्ष सीनेटर बॉब मेनेंदेज ने इस पर नाराजगी जतायी कि समिति के समक्ष 55 नामांकन अब भी लंबित हैं और दुनियाभर में कई चुनौतियां उनका इंतजार कर रही हैं। उन्होंने कहा, ‘‘जैसा कि मैने इस समिति और सीनेट के समक्ष कई बार कहा है कि लंबे समय तक पदों को रिक्त रखना हमारे हित में नहीं है।’’

रैंकिंग सदस्य जिम रिश्च ने जर्मनी के राजदूत पद पर नामांकन के विरोध में मत दिया। उन्होंने कहा, ‘‘मैं डॉ. गटमैन के खिलाफ ‘ना’ में वोट दे रहा हूं लेकिन यह निजी मसला नहीं है। मैं उनके साथ काम करने और जर्मनी के साथ हमारा गठबंधन मजबूत करने के लिए तैयार हूं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘निश्चित तौर पर वह योग्य हैं, उनका लंबा और सफल करियर रहा है लेकिन मुझे लगता है कि यह संभवत: यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिलवेनिया में काम करने को लेकर रहा, जो चीन से लाखों डॉलर का चंदा लेता है। अमेरिका के उच्च शिक्षा संस्थानों में विदेशी, खासतौर से चीन के प्रभाव का मुद्दा इस समिति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।’’

बाइडन के नामांकित करने के बाद गार्सेटी ने कहा था कि उन्हें नामांकन स्वीकार करते हुए गर्व महसूस हो रहा है और वह दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में अपनी नयी भूमिका को उसी ऊर्जा, प्रतिबद्धता और प्यार से निभाएंगे जैसा कि उन्होंने लॉस एंजिलिस शहर में पद पर रहते हुए निभायी।

गार्सेटी कई बार भारत गए हैं। उन्होंने कॉलेज में एक साल हिंदी और उर्दू भी पढ़ी है।

गार्सेटी अमेरिकी नौसेना के रिजर्व कॉम्पोनेंट में खुफिया अधिकारी के तौर पर 12 साल तक विभिन्न पदों पर रहे और 2017 में लेफ्टिनेंट के पद से सेवानिवृत्त हुए। गार्सेटी बाइडन के राष्ट्रपति अभियान के राष्ट्रीय सह-अध्यक्ष भी रहे।

क्रेडिट : पेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
फोटो क्रेडिट : Wikimedia commons

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