कोलकाता, गणेश उत्सव शुरू होने में महज दो दिन शेष रह जाने के चलते शहर में मूर्तिकार प्रतिमाओं को अंतिम रूप दे रहे हैं। साथ ही, जो प्रतिमाएं तैयार कर ली गई हैं, उन्हें विभिन्न क्लब और पंडालों में भेजने की तैयारी की जा रही है।बीते कुछ वर्षों में कोलकाता में गणेश पूजा आयोजित करने का चलन बढ़ा है और हाल के दिनों में थीम-आधारित उत्सव एक बड़ा आकर्षण बन रहा है।इस साल यहां चंद्रयान-3 थीम के पंडाल की सबसे अधिक मांग है। चंद्रयान-3, चंद्रमा के लिए भारत का सफल मिशन है।श्री श्री गणेश चतुर्थी महोत्सव द्वारा साल्ट लेक के बीबी ब्लॉक में पूजा पंडाल के ऊपर चंद्रयान रॉकेट का एक मॉडल रखा गया है। पंडाल के अंदर, भगवान गणेश की प्रतिमा चंद्रमा की सतह की एक विशाल तस्वीर के सामने एक मंच पर सजा कर रखी गई है, जहां कुछ दूरी पर पृथ्वी दिखाई दे रही है।पूजा समिति के अध्यक्ष अनिंद्य चटर्जी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि पृष्ठभूमि को सजाने के लिए लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान की तस्वीरों का भी इस्तेमाल किया गया है, ताकि पंडाल में मौजूद लोगों को ऐसा लगे कि भगवान गणेश चंद्रमा की सतह पर एक सिंहासन पर विराजमान हैं।उन्होंने बताया कि सार्वजनिक संबोधन प्रणाली पर हर आधे घंटे में कमेंट्री चंद्रयान की चंद्रमा की यात्रा की उलटी गिनती सुनाएगी। इसे वास्तविक जैसा आभास कराने के लिये पंडाल के ऊपर रखे गये रॉकेट के ‘थ्रस्टर्स’ से धुआं निकलेगा। उत्सव का विषय ‘परी दिते परी’ (हम यात्रा कर सकते हैं) है।समिति पिछले 14 वर्षों से गणेश उत्सव का आयोजन कर रही है और उपनगरीय इलाके में सबसे पुरानी मानी जाती है।उन्होंने कहा, “इस साल, हमारी गणेश पूजा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की टीम को समर्पित है। इसरो ने 23 अगस्त को चंद्रयान-3 को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेजा और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचा।”बागुईआटी में वीआईपी रोड के पास एक पूजा समिति ने भी अपने गणेश पूजा पंडाल का उपयोग इसरो की उपलब्धि को प्रदर्शित करने के लिए किया है।उत्तरी कोलकाता में मुरारीपुकुर गणेश पूजा समिति के सदस्य अभिषेक दास ने कहा कि वे बड़े पैमाने पर पूजा आयोजित कर रहे हैं, लेकिन कोई विशेष थीम नहीं है।
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