कोविड-19 के कारण हैती में इस साल बच्चों में कुपोषण के मामले बढ़े

लेस केएस, हैती में इस साल वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के कारण उत्पन्न हुई परेशानियों, हिंसा और घटते संसाधनों के कारण अत्यंत गंभीर बाल्यावस्था कुपोषण के दुगुने से अधिक होने की आशंका है।

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) की एक रिपोर्ट में लैटिन अमेरिका और कैरिबियन के लिए यूनिसेफ की क्षेत्रीय निदेशक जीन गोह ने बताया कि पांच साल से कम उम्र के 86 हजार से अधिक बच्चे प्रभावित हो सकते हैं, जबकि पिछले साल इस उम्र के 41 हजार बच्चे प्रभावित हुए थे।

उन्होंने हैती का एक सप्ताह का दौरा करने के बाद कहा, ‘‘ मैं यह देखकर दुखी हूं कि इतने सारे बच्चे कुपोषण से पीड़ित हैं। इनमें से कई ऐसी हालत में हैं, जिन्हें सही समय पर उपचार नहीं मिला तो वे ठीक नहीं हो पाएंगे।’’

अत्यंत गंभीर कुपोषण को जानलेवा माना जाता है।

हैती में इसकी थोड़ी कम खतरनाक श्रेणी ‘गंभीर कुपोषण’ के मामलों में पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में 61 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, पिछले वर्ष 1,34,000 की तुलना में इस वर्ष कुछ 2,17,000 बच्चों के इससे पीड़ित होने की आशंका है।

यूनिसेफ ने कहा कि हैती की 1.1 करोड़ आबादी में से 44 लाख लोगों को पर्याप्त भोजन नहीं मिल पाता, जिसमें से 19 लाख बच्चे हैं।

अधिकारियों ने बताया कि वैश्विक महामारी ने स्वास्थ्य सेवाओं को भी बाधित कर दिया है, टीके के कारण बच्चों के टीकाकरण की दर 28 प्रतिशत से गिरकर 44 प्रतिशत हो गई है। इस कमी के कारण ‘डिप्थीरिया’ (नाक और गले का एक गंभीर संक्रमण) के मामलों में वृद्धि हुई है।

यूनिसेफ ने कहा कि टीका ना लगने के कारण भी बच्चों के कुपोषण से मरने की अधिक आशंका है।

क्रेडिट : पेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
फोटो क्रेडिट : Wikimedia commons

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