जरूरी नहीं कि ग्रीनलैंड के विशाल प्राकृतिक संसाधन भारी मुनाफे में तब्दील हों

 लंदन, अमेरिका एक बार फिर ग्रीनलैंड को लेकर धमकियां दे रहा है। विशाल द्वीप के प्राकृतिक संसाधन एक बार फिर चर्चा में हैं। इससे ठीक एक साल पहले तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइकल वाल्ट्ज़ ने इसके बारे में घोषणा की थी कि यह महत्वपूर्ण खनिजों और प्राकृतिक संसाधनों के बारे में है।

             ग्रीनलैंड जीवाश्म ईंधन और महत्वपूर्ण कच्चे माल दोनों से समृद्ध है। यूरोपीय संघ द्वारा महत्वपूर्ण माने जाने वाले 34 कच्चे माल में से कम से कम 25 ग्रीनलैंड में मौजूद हैं।

             इन संसाधनों के मूल्य का अनुमान लगाना कठिन है क्योंकि तेल और महत्वपूर्ण कच्चे माल की कीमतें बहुत अधिक घटती-बढ़ती रहती हैं। वेनेजुएला के तेल की तरह ही  ग्रीनलैंड में प्राकृतिक संसाधनों के खनन के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे के निर्माण में बहुत अधिक धन लगेगा।

             खनन और जीवाश्म ईंधन परियोजनाएं पूंजी केंद्रित होती हैं  जिनमें परियोजनाओं से लाभ मिलने से पहले बड़ा प्रारंभिक निवेश और लंबा समय लगता है।

             ग्रीनलैंड की राजधानी नुउक के बाहर लगभग कोई सड़क अवसंरचना नहीं है और बड़े टैंकरों तथा कंटेनर जहाजों के लिए गहरे पानी के सीमित बंदरगाह हैं। विश्वभर में  निजी खनन और जीवाश्म ईंधन निगम अपने संचालन को लाभदायक बनाने के लिए सड़कों  बंदरगाहों  बिजली उत्पादन  आवास तथा विशेषज्ञ श्रमिकों जैसे सार्वजनिक बुनियादी ढांचे का दोहन कर सकते हैं।

             ऐसे में सरकार के सामने एक जटिल दुविधा खड़ी हो जाती है। क्या निजी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को खनन करने की अनुमति दी जाए  लेकिन राजस्व का बड़ा हिस्सा खोना पड़ेगा  या फिर राज्य के स्वामित्व पर जोर दिया जाए  लेकिन खनन को संभव बनाने के लिए पूंजी और सरकारी क्षमता जुटाने में संघर्ष करना पड़ेगा ग्रीनलैंड की खनिज संपदा के बारे में काफी समय से जानकारी है। अप्रैल 2025 में  डेनमार्क के सरकारी प्रसारक डीआर ने एक वृत्तचित्र प्रसारित किया जिसमें दिखाया गया कि डेनमार्क ने ऐतिहासिक रूप से ग्रीनलैंड में क्रायोलाइट खदान से मुनाफा कैसे प्राप्त किया।

             इस कार्यक्रम के कारण एक बड़ा राजनीतिक और मीडिया संकट उत्पन्न हो गया  क्योंकि कुछ लोगों का मानना ​​था कि इसने डेनमार्क पर ग्रीनलैंड की वित्तीय निर्भरता की धारणा को चुनौती दी। ग्रीनलैंड और बाकी दुनिया के बीच संबंधों में खनिज एक महत्वपूर्ण लेकिन संवेदनशील विषय है।

             विदेशी कंपनियों ने दशकों से ग्रीनलैंड में व्यवहार्य खनन उद्योग स्थापित करने की कोशिश की है  लेकिन उन्हें इसमें कोई खास सफलता नहीं मिली है। दरअसल  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों के विपरीत  अमेरिकी निगमों के पास लंबे समय से ग्रीनलैंड के खनन क्षेत्र में प्रवेश करने का अवसर रहा है।

             अत्यधिक पूंजी निवेश और बेहद खराब जलवायु परिस्थितियों के कारण अब तक किसी भी कंपनी ने व्यावसायिक खनन गतिविधियां शुरू नहीं की हैं।

             ग्रीनलैंड की प्राकृतिक संसाधन मंत्री नाजा नतानिएल्सन ने 2025 में कहा था कि वह चाहती हैं कि खनन देश की मत्स्य पालन उद्योग पर अत्यधिक निर्भरता का एक ‘‘बहुत अच्छा  स्थिर पूरक’’ बने।

             फिर भी  2021 में ग्रीनलैंड की नयी समाजवादी अताकतिगिट सरकार ने प्रदूषण के आधार पर यूरेनियम खनन पर प्रतिबंध लगा दिया। ऑस्ट्रेलियाई कंपनी एनर्जी ट्रांजिशन मिनरल्स (ईटीएम) ने 2023 में ग्रीनलैंड और डेनमार्क पर 76 अरब क्रोनर (8.9 अरब पाउंड) का मुकदमा दायर किया  जो ग्रीनलैंड के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के लगभग चार गुना के बराबर है।

             खनन कंपनी ने दावा किया कि कुआनर्सुइट/क्वानेफजेल्ड में उसकी यूरेनियम परियोजना को बंद किए जाने के बाद उसे भविष्य के मुनाफे से वंचित कर दिया गया है।

             डेनमार्क की अदालतों ने ईटीएम के अधिकतर दावों को निराधार बताकर खारिज कर दिया है और ऐसी आशंकाएं जताई जा रही हैं कि ईटीएम खुद को दिवालिया घोषित कर सकती है तथा इस तरह संभावित रूप से भारी कानूनी खर्चों का भुगतान करने से बच सकती है।

             हाल ही में  ऑस्ट्रेलियाई-अमेरिकी निगम ‘क्रिटिकल मेटल्स’ को दक्षिणी ग्रीनलैंड में भारी दुर्लभ पृथ्वी तत्वों सहित दुर्लभ पृथ्वी खनिजों की आपूर्ति के लिए अपनी तानब्रीज परियोजना के वास्ते एक स्थायी कार्यालय के निर्माण की मंजूरी प्राप्त हुई है।

             अगले दिन  खनन कंपनी अमरोक ने घोषणा की कि अमेरिका एक्जिम  एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक के माध्यम से दक्षिणी ग्रीनलैंड में उसकी खनन परियोजनाओं में निवेश करने पर विचार कर रहा है। यदि सरकारी ऋण स्वीकृत हो जाता है  तो यह ट्रंप का किसी विदेशी खनन परियोजना में पहला ऋण होगा।

             तेल और गैस की अस्थिर कीमतों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के समान जलवायु और अवसंरचना संबंधी चुनौतियों के कारण  ग्रीनलैंड में जीवाश्म ईंधन का उत्पादन अमेरिका के पूर्ण नियंत्रण की स्थिति में भी असंभव है।

             ट्रंप प्रशासन के आर्कटिक पर प्रभुत्व स्थापित करने के कई कारण हो सकते हैं  जिनमें से एक प्रमुख कारण रूस और चीन पर सापेक्षिक शक्ति प्राप्त करना है। लेकिन प्राकृतिक संसाधनों का दोहन शायद ही इसमें प्रमुख भूमिका निभाएगा।

             इसके अलावा  डेनमार्क के साथ रक्षा समझौते के तहत अमेरिका के ग्रीनलैंड में पहले से ही सैन्य अड्डे मौजूद हैं। ऐसे में  यह अधिक संभावना है कि अमेरिका के हालिया कदम देश की साम्राज्यवादी महत्वाकांक्षाओं की वापसी का एक और अध्याय हैं।

क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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