जेएनयू छात्राओं की याचिका पर अदालत ने आप सरकार और दिल्ली पुलिस से मांगा जवाब

नयी दिल्ली, दिल्ली उच्च न्यायालय ने पिछले साल के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में जेएनयू छात्रा नताशा नरवाल और देवांगना कलिता की जमानत याचिकाएं एक निचली अदालत द्वारा खारिज किये जाने के खिलाफ की गई उनकी अपील पर आप सरकार और दिल्ली पुलिस से शुक्रवार को जवाब तलब किया है।

नरवाल और कलिता के खिलाफ यह मामला गैर कानूनी गतिविधि (रोकथाम) कानून के तहत दर्ज किया गया था।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति ए जे भंभानी की पीठ ने दिल्ली सरकार और पुलिस को नोटिस जारी किया तथा दोनों अपीलों पर सुनवाई की अगली तारीख 10 मार्च तक जवाब देने का निर्देश दिया।

दोनों छात्राओं के अधिवक्ता अदित एस पुजारी ने पीठ के समक्ष दलील दी कि इस मामले की जांच में गड़बड़ी हुई है।

नरवाल और कलिता, पिंजरा तोड़ समूह की सदस्य हैं। उन्हें उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के सिलसिले में पिछले साल मई में गिरफ्तार किया गया था और वे फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।

उन्हें दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने गिरफ्तार किया था और उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता के विभिन्न प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया था। उन पर दंगा करने, गैर कानूनी रूप से एकत्र होने और हत्या का प्रयास करने के आरोप हैं।

उन पर पिछले साल फरवरी में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा से जुड़े एक मामले में गैर कानूनी गतिविधि (रोकथाम) कानून के तहत भी मामला भी दर्ज है। दंगों की साजिश का कथित तौर पर हिस्सा रहने को लेकर यह मामला दर्ज किया गया था।

कलिता के खिलाफ कुल चार मामले दर्ज हैं, जिनमें दिसंबर 2019 के दौरान पुरानी दिल्ली के दरियागंज इलाके में संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ हुए प्रदर्शनों को लेकर दर्ज मामला भी शामिल है। वहीं, नरवाल के खिलाफ तीन मामले दर्ज हैं।

दोनों को यूएपीए के तहत दर्ज एक मामले को छोड़ कर अन्य मामलों में जमानत मिल चुकी है।

निचली अदलत ने यूएपीए मामले में उनकी जमानत याचिकाएं 28 जनवरी को खारिज कर दी थी।

क्रेडिट : पेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया

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