तालिबान के साथ कूटनीतिक वार्ताओं के बीच कतर ने उसके साथ साझेदारी पर जोर दिया

दुबई, कतर के विदेश मंत्री ने कहा है कि अफगानिस्तान और उसके नये तालिबान शासकों को अलग-थलग करना कभी समाधान नहीं हो सकता। उन्होंने बुधवार को कहा कि तालिबान के साथ साझेदारी से कमजोर आवाजों को ताकत दी जा सकती है।

विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने कतर में हो रहीं कूटनीतिक वार्ताओं के बीच यह बात कही। तालिबान ने अगस्त में अफगानिस्तान पर कब्जा करने से पहले सालों तक कतर में अपना एक राजनीतिक कार्यालय संचालित किया।

दुनिया की नजरें इस बात पर हैं कि दो दशक की चरमपंथी गतिविधियों और शासन पाने के लिए जंग के बाद काबुल पर नियंत्रण पाने तक तालिबान में किस तरह का बदलाव हुआ है।

अमेरिका, 10 यूरोपीय देशों और यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों ने इस सप्ताह कतर की राजधानी दोहा में तालिबान के नेताओं के साथ आमने-सामने बैठकर बातचीत की जो तालिबान के शासन पर काबिज होने के बाद से इस तरह की पहली बैठक है।

अल थानी ने दोहा में आतंकवाद निरोधक विशेषज्ञों से कहा कि कतर का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को केवल तालिबान के ‘नकारात्मक कदमों’ के लिए उन्हें दंडित करने की बात करने के बजाय उनसे सही कदम उठाने के लिए कहना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘इससे प्रगति और आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।’’

अल थानी ने कहा, ‘‘इससे कमजोर आवाजों को उनकी सरकार में और अधिक प्रभावशाली बनने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करने में मदद मिलेगी।’’

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने मंगलवार को कहा कि वाशिंगटन ने इस सप्ताह तालिबान के साथ बातचीत में स्पष्ट कर दिया है कि इस संगठन को आतंकवाद से लड़ने एवं मानवाधिकारों को बचाने से संबंधित मुद्दों पर उसकी कार्रवाई से परखा जाएगा।

क्रेडिट : पेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
फोटो क्रेडिट : Wikimedia commons

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