‘थ्री सिस्टर्स एंड ए ड्रीम’ कन्या भ्रूण हत्या पर समाज को कड़ा संदेश देती है : निर्देशक

रांची, फिल्म ‘थ्री सिस्टर्स एंड ए ड्रीम’ से निर्देशन के क्षेत्र में आए आईपीएस से फिल्मकार बने संजय रंजन सिंह ने कहा है कि वह भारतीय समाज में कन्या भ्रूण हत्या की कुरीति को रेखांकित करना चाहते हैं।

फिल्म में अदाकारा बिदिता बाग केंद्रीय भूमिका में हैं। यह फिल्म राधा नामक एक महिला के इर्द-गिर्द घूमती है, जो सड़कों पर रहने वाली तीन बच्चियों को पालने का फैसला करती है। आगे चलकर तीनों लड़कियां आईएएस अधिकारी बनती हैं।

निर्देशक ने ‘भाषा’ से कहा, ‘‘मैं कन्या भ्रूण हत्या की कुरीति और बच्चियों के बारे में समाज को एक कड़ा संदेश देना चाहता था। मुझे लगता है कि बालिकाओं की मौत पर हमारे समाज में संवेदनशीलता नहीं है।’’

गीतकार और पटकथा लेखक सिंह ने कहा, ‘‘‘थ्री सिस्टर्स एंड ए ड्रीम’ में एक मां और उसकी तीन बेटियों की यात्रा को दिखाया गया है। इसमें इंसानी जज्जाब के हरेक रंग हैं और समाज के बुनियादी मूल्यों और परंपरा को रेखांकित किया गया है।’’

एक मां अपने करियर की कुर्बानी देती है, लेकिन वह गोद ली हुई अपनी बेटियों को कभी इसकी असलियत का पता नहीं लगने देती।

निर्देशक ने कहा कि फिलहाल यह फिल्म ‘एमएक्स प्लेयर’ पर प्रदर्शित की गयी है। इसमें छात्रों के संघर्ष, लड़कियों के आईएएस अधिकारी बनने की महत्वाकांक्षा भी दिखायी गयी है।

बाग ने कहा कि उन्हें फिल्म के किरदार ने काफी आकर्षित किया। उन्होंने कहा, ‘‘ईश्वर ने सभी माताओं को एक समान बनाया है। वे निस्वार्थ भाव से बिना बताए अपने बच्चों के लिए हर चीज का बलिदान कर देती हैं।’’

फिल्म में कीर्ति आदरकर और ओंकार दास माणिकपुरी ने भी भूमिका निभायी है।

क्रेडिट : पेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया

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