मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने वायु प्रदूषण कम करने के लिए एक व्यापक एक्शन प्लान 2026 लॉन्च किया है। इसमें कड़े नियम लागू किए गए हैं, जैसे “No PUC, No Fuel” (बिना PUC के ईंधन नहीं) नियम और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर और भी कड़ी पाबंदियां।यह प्लान सिर्फ़ कागज़ों पर नीति बनाने के बजाय उसे ज़मीन पर उतारने पर ज़ोर देता है। इसका मकसद प्रदूषण के मुख्य स्रोतों को निशाना बनाना है, जिनमें वाहनों से निकलने वाला धुआँ, सड़कों की धूल, निर्माण कार्य, औद्योगिक प्रदूषण और बायोमास जलाना शामिल हैं। इस प्लान का एक अहम नियम यह है कि जिन वाहनों के पास वैध Pollution Under Control (PUC) सर्टिफ़िकेट नहीं होगा, उन्हें ईंधन भरवाने की इजाज़त नहीं होगी। इस नियम को लागू करने में ANPR कैमरों और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम की मदद ली जाएगी।
1 नवंबर से, दिल्ली में सिर्फ़ BS-VI मानकों का पालन करने वाले, CNG से चलने वाले या इलेक्ट्रिक मालवाहक वाहनों को ही आने की इजाज़त होगी। इसके अलावा, गैर-ज़रूरी ट्रैफ़िक को भी नियंत्रित किया जा सकता है। जब प्रदूषण का स्तर बहुत ज़्यादा बढ़ जाएगा, तो कुछ और कदम भी उठाए जा सकते हैं, जैसे ऑफ़िस के समय में बदलाव करना, घर से काम करने (Work-from-home) की व्यवस्था करना और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर पाबंदी लगाना।निगरानी और शासन व्यवस्था को और मज़बूत बनाने के लिए, सरकार एक केंद्रीय ‘ग्रीन वॉर रूम’ और एक ‘इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर’ बनाएगी। इसके साथ ही, हर वार्ड के स्तर पर ‘Air Guardian’ (वायु रक्षक) टीमें भी बनाई जाएंगी, जो प्रदूषण पर लगातार नज़र रखेंगी और ज़रूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई करेंगी।इस प्लान का एक और मकसद सड़कों पर भीड़भाड़ और धूल से होने वाले प्रदूषण को कम करना है। अधिकारियों ने ट्रैफ़िक की 62 ऐसी जगहों (Hotspots) की पहचान की है, जहाँ खास तौर पर ध्यान दिया जाएगा।
साथ ही, पूरे शहर में एक ‘इंटेलिजेंट ट्रैफ़िक मैनेजमेंट सिस्टम’ लागू किया जाएगा। सड़कों की सफ़ाई करने वाली मशीनों (Mechanical road sweepers), पानी का छिड़काव करने वाले वाहनों, ‘एंटी-स्मॉग गन’ और ‘मिस्ट स्प्रे सिस्टम’ को बड़े पैमाने पर इस्तेमाल में लाया जा रहा है। बड़ी इमारतों के लिए भी इन सिस्टम का इस्तेमाल करना अब अनिवार्य कर दिया गया है।सार्वजनिक परिवहन और पर्यावरण के अनुकूल आवागमन (Green mobility) इस प्लान के मुख्य आधार हैं। रणनीति के मुख्य स्तंभ। बसों के बेड़े का काफ़ी विस्तार किया जाएगा, जिसमें इलेक्ट्रिक बसों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा; साथ ही, अगले चार वर्षों में 32,000 EV चार्जिंग स्टेशन भी लगाए जाएँगे। ‘लास्ट-माइल कनेक्टिविटी’ (अंतिम-छोर तक पहुँच) को बेहतर बनाने के लिए दिल्ली मेट्रो को ‘फ़ीडर सेवाओं’ के साथ जोड़ने की भी योजना है। विभिन्न क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की गति तेज़ करने के लिए, एक नई ‘इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2026’ भी तैयार की जा रही है।
बायोमास जलाने पर रोक लगाने के लिए कड़े कदम भी उठाए गए हैं; इनमें बायोमास जलाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाना, जागरूकता अभियान चलाना और इलेक्ट्रिक हीटिंग जैसे वैकल्पिक उपायों को बढ़ावा देना शामिल है। ओखला, भलस्वा और गाज़ीपुर जैसे प्रमुख स्थलों पर लैंडफ़िल (कचरा-भराव क्षेत्र) को साफ़ करने के लिए समय-सीमा भी निर्धारित कर दी गई है।https://x.com/gupta_rekha/status/2038509973819560283/photo/3