दिव्यांग कैडेट को लाभ देने पर फैसला नहीं हुआ तो रक्षा, वित्त सचिवों को तलब करेंगे: न्यायालय

नयी दिल्ली, उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को चेतावनी दी कि अगर संबंधित मंत्रालय प्रशिक्षण के दौरान दिव्यांगता के कारण अयोग्य हुए सैन्य कैडेट को मौद्रिक लाभ देने के मुद्दे पर निर्णय नहीं लेते हैं तो वह रक्षा सचिव और वित्त सचिव को तलब कर सकता है। न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ उन कैडेट की कठिनाइयों से संबंधित एक स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही थी जिन्हें प्रशिक्षण के दौरान चोट या दिव्यांगता के कारण बाहर कर दिया गया था।

अदालत ने कहा ‘‘हमने पहले ही संबंधित मंत्रालयों को पर्याप्त समय दिया है। यदि मामले में कोई प्रगति नहीं हुई तो हम इस अदालत के समक्ष रक्षा सचिव और वित्त सचिव की पेशी का निर्देश देने के लिए बाध्य होंगे।’’ पीठ ने कहा कि अदालत ने इस मुद्दे पर निर्णय लेने के लिए अधिकारियों को छह सप्ताह का समय दिया था लेकिन रक्षा या वित्त मंत्रालय की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने पीठ से इस मुद्दे पर निर्णय लेने के लिए मंत्रालयों को कुछ और समय देने का आग्रह किया और कहा कि उन्होंने मामले को सुलझाने की पूरी कोशिश की है।

उन्होंने अदालत को सूचित किया कि थलसेना नौसेना और वायुसेना के तीनों प्रमुखों ने कैडेट की स्थिति में सुधार के उपायों पर सिफारिशें की थीं लेकिन संबंधित मंत्रालयों ने इस मामले में कोई निर्णय नहीं लिया है। न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि इस मुद्दे पर रक्षा मंत्रालय और वित्त मंत्रालय दोनों के बीच समन्वय की आवश्यकता है और सुझाव दिया कि एक संयुक्त बैठक से मामले को सुलझाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा ‘‘आवश्यक मौद्रिक आवंटन बजट का हिस्सा होना चाहिए था। वित्त अधिनियम अभी तक पारित नहीं हुआ है इसलिए समय है।’’

अदालत ने कहा कि वित्त अधिनियम 2026 विचाराधीन है और यह इन कैडेट की मौद्रिक जरूरतों को पूरा करने के लिए आवश्यक धन का विश्लेषण करने का सबसे अच्छा समय है। पिछले साल 18 अगस्त को शीर्ष अदालत ने कहा था कि वह चाहती है कि रक्षा बलों में ‘‘बहादुर कैडेट’’ हों जो प्रशिक्षण के दौरान लगी चोटों या दिव्यांगता से विचलित न हों और केंद्र को ऐसी आपात स्थितियों के लिए उन्हें बीमा कवर प्रदान करने की संभावना तलाशने का निर्देश दिया।

एक रिपोर्ट के अनुसार लगभग 500 अधिकारी कैडेट थे जिन्हें प्रशिक्षण के दौरान अलग-अलग प्रकार की दिव्यांगता के कारण 1985 से इन सैन्य संस्थानों से चिकित्सकीय रूप से छुट्टी दे दी गई थी और अब वे अनुग्रह राशि के मासिक भुगतान के साथ बढ़ते मेडिकल बिल का सामना कर रहे हैं जो उनकी जरूरत से बहुत कम है।क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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