परमाणु हथियार बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है ईरान : मंत्री ने पश्चिमी देशों को चेताया

तेहरान, ईरान के खुफिया मामलों के मंत्री ने पश्चिमी देशों को चेताया कि अगर देश पर लागू किए गए कठोर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध जारी रहे तो तेहरान परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। सरकारी टीवी चैनल ने मंगलवार को यह खबर दी।

मंत्री महमूद अलवी का यह बयान बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि विरले मौके पर ही किसी सरकारी अधिकारी ने यह कहा है ईरान अपनी परमाणु परियोजना को फिर से शुरू कर सकता है। तेहरान हमेशा से कहता रहा है कि उसकी परियोजना शांतिपूर्ण है और उसका लक्ष्य ऊर्जा उत्पादन और मेडिकल अनुसंधान है।

देश के सुप्रीम नेता आयतुल्ला अली खामनेइ ने 1990 के दशक में जारी फतवे में कहा था कि परमाणु हथियार निषिद्ध हैं।

खबर के अनुसार, अलवी ने कहा, ‘‘हमारी परमाणु परियोजना शांतिपूर्ण है और सुप्रीम नेता का फतवा परमाणु हथियारों को वर्जित ठहराता है। लेकिन अगर ईरान को उस दिशा में धकेला गया तो वह ईरान की नहीं, बल्कि उनकी गलती होगी।’’

हालांकि, अलवी ने कहा कि मौजूदा स्थिति में ईरान की योजना परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में बढ़ने की नहीं है। लेकिन उन्होंने यह भी कहा, ‘‘अगर किसी बिल्ली की भी बात करें तो यदि उसे चारों ओर से घेर किया जाए तो वह भी असामान्य व्यवहार कर सकती है।’’

हालांकि, इज़राइल लगातार कहता रहा है कि ईरान की परमाणु योजना का लक्ष्य हथियार विकसित करना है और वह हमेशा से देश के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और अनुसंधान तथा अन्य तकनीकों का उदाहरण देता है।

ईरान में सभी मामलों पर अंतिम फैसला देने वाले 81 वर्षीय खामनेइ ने रविवार को अमेरिका से कहा था कि अगर वह चाहता है कि ईरान 2015 के परमाणु समझौते के सभी प्रावधानों को माने तो उसपर लगे सभी प्रतिबंधों को हटाना होगा। हालांकि, अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन कह चुके हैं कि उनका प्रशासन इस दिशा में पहले कदम नहीं बढ़ाएगा।

गौरतलब है कि अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने परमाणु समझौते से देश को अलग कर लिया था।

सरकारी टीवी पर मंगलवार को प्रसारित बयान में ईरान के राष्ट्रपति हसन रुहानी ने दोहराया कि परमाणु समझौते का सम्मान करने के लिए अमेरिका ही पहला कदम उठाए। उन्होंने कहा, ‘‘जिस दिन अमेरिका परमाणु समझौते के तहत अपने वादों को पूरा करना शुरू करेगा, हम भी अपने वादे निभाने शुरू कर देंगे।’’

देश के सैन्य परमाणु कार्यक्रम को आधार देने वाले ईरानी वैज्ञानिक की पिछले साल दिसंबर में हत्या के बाद ईरान की संसद ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु निरीक्षकों पर प्रतिबंध लगाने के लिए कानून बनाया है। यह 2015 के परमाणु समझौते का उल्लंघन है।

क्रेडिट : पेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया

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