पश्चिम एशिया संघर्ष पर मतभेद को लेकर संयुक्त बयान के बिना समाप्त हुआ ब्रिक्स सम्मेलन

नयी दिल्ली, पश्चिम एशिया संघर्ष पर मतभेद के मद्देनजर ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्री दो दिवसीय सम्मेलन के अंत में एक संयुक्त बयान जारी करने में विफल रहे। इस दौरान ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस संवेदनशील मुद्दे पर आम सहमति न बन पाने के लिए संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को जिम्मेदार ठहराया।

बैठक में गतिरोध जारी रहने पर मेजबान के रूप में नयी दिल्ली ने अध्यक्ष का वक्तव्य और इसके परिणाम से जुड़ा दस्तावेज जारी किया जिसमें दो विशिष्ट अनुच्छेद शामिल थे जिन पर सदस्य देशों के बीच सर्वसम्मति नहीं बन पाई थी।

इन अनुच्छेदों में फलस्तीनी प्राधिकरण के तहत वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी को एकजुट करने के महत्व का उल्लेख था और साथ ही लाल सागर और बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य में सभी देशों के जहाजों के लिए नौवहन अधिकारों और स्वतंत्रता की मांग की गई थी।

ब्रिक्स के वर्तमान अध्यक्ष के रूप भारत ने सितंबर में होने वाले समूह के वार्षिक शिखर सम्मेलन से पहले विदेश मंत्रियों के सम्मेलन की मेजबानी की। पश्चिम एशिया संकट को लेकर ईरान और यूएई के बीच तीखे मतभेद बृहस्पतिवार को बैठक में खुलकर सामने आए।

ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने एक मीडिया वार्ता में कहा “हर कोई जानता है कि किस देश ने इजराइल के खिलाफ किसी भी कार्रवाई को रोका और यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण था। उसी देश ने अमेरिका और इजराइल को ईरान के खिलाफ उनके हमले उनकी आक्रामकता में मदद की।”

परिणाम दस्तावेज और अध्यक्ष के वक्तव्य में भारत ने कहा “पश्चिम एशिया की स्थिति के संबंध में कुछ सदस्यों के बीच अलग-अलग विचार थे।”क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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