बच्चों की भलाई हमेशा प्राथमिकता में रखें, लॉकडाउन के दौरान उनकी मदद के लिए कुछ सलाह

सिडनी, हम सब जानते हैं कि कोविड-19 महामारी के दौरान लगाया गया लॉकडाउन हमारे बच्चों के लिए कई चुनौतियां पैदा कर रहा है। हालांकि, उनके सामाजिक और भावनात्मक कल्याण के लिए हम अपने जीवन में इस रुकावट के बावजूद उन्हें आगामी जीवन के लिए मदद कर सकते हैं।

सामाजिक और भावनात्मक कल्याण स्वयं को और दूसरों को समझने और जीवन की चुनौतियों का प्रबंधन करने की क्षमता से संबंधित है। इसके लिए कौशल की आवश्यकता होती है। इनमें शामिल हैं- अपनी भावनाओं और दूसरों की भावनाओं को समझें और उनसे जुड़ें, सकारात्मक संबंध बनाएं और चुनौतियों का सामना करें तथा डटे रहें।

सेहतमंद होना, प्रसन्न रहना, व्यापक अवधारणा है जो बच्चों के बीच अंतर को पहचानते हुए व्यक्ति और उनके संदर्भ को शामिल करती है। यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि खुशहाली, बेहतर अनुभव और विकास दोनों की प्रक्रिया है, इसलिए कौशल उम्र और परिस्थितियों के साथ भिन्न होते हैं।

पिछले साल घर से स्कूली शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों के लिए स्वास्थ्य की हानि को लॉकडाउन के सबसे बड़े नुकसान के रूप में दिखाया गया। लॉकडाउन के दौरान स्कूली शिक्षा का अनुभव अलग-अलग होता है, लेकिन सबसे बड़ा प्रभाव यह है कि यह मौजूदा असमानताओं को बदतर बना देता है। बहुत सारे बच्चों और युवाओं का जीवन भारी कठिनाई के बीच बीतता है और कई के लिए सीमित अवसर होते हैं। लॉकडाउन से पहले भी यही स्थिति थी, लेकिन समस्या और बढ़ गई है।

छात्रों की जरूरतों को पूरा करने के लिए स्कूल अथक प्रयास करते रहते हैं। यह पहचानना महत्वपूर्ण है कि ऐसे सामाजिक मुद्दे हैं जिनके लिए स्कूली शिक्षा से परे व्यापक कार्य की आवश्यकता होती है। कौशल विकसित करने से कल्याण में मदद मिलती है। सामाजिक और भावनात्मक कल्याण के व्यक्तिगत पहलू में प्रमुख कौशलों का निरंतर विकास शामिल है।

जैसे-जैसे हमारे जीवन के अनुभव का विस्तार होता है, हमारे सामने आने वाली चुनौतियां और अधिक जटिल होती जाती हैं, ऐसे में ये कौशल बढ़ते और विकसित होते हैं। सामाजिक और भावनात्मक कल्याण के विकास के लाभ अपने आप में महत्वपूर्ण हैं।

खुशहाली, कौशल को लॉकडाउन के दौरान स्कूली शिक्षा में छात्रों की मदद करने के रूप में पहचाना गया है। स्व-संगठन, स्वायत्तता और माहौल के हिसाब से ढलने की क्षमता छात्रों को लॉकडाउन के दौरान आगे बढ़ने में सक्षम बनाती है। लॉकडाउन के दौरान स्कूली शिक्षा जीवन की अन्य चुनौतियों के संदर्भ में इन कौशलों को विकसित करने का अवसर भी प्रदान करती है।

बच्चों की भलाई के लिए हम क्या कर सकते हैं?

संभावित फायदे पर ध्यान दें। हमें विपरीत परिस्थितियों की चुनौती के साथ काम करने के लिए अपने बच्चों का समर्थन करके आगे बढ़ने में सक्षम होने की आवश्यकता है। अपनी भलाई का ख्याल रखें। सभी के लिए आवश्यक दैनिक गतिविधियों में भाग लें। खेल-कूद में हिस्सा लें, व्यायाम करें, बाहर जाएं, मेलजोल करें और जुड़ाव पर विचार करें। बहुत संभावनाएं हैं कि इनमें से प्रत्येक गतिविधि लॉकडाउन से पहले की हमारे द्वारा चुनी गई गतिविधियों से भिन्न दिखेगी।

व्यक्तिगत कौशल विकसित करें। हालात के मुताबिक खुद को तैयार करें। साथ ही, बच्चों में तनाव अलग दिखता है। वे आक्रामक, उद्दंड, क्रोधित हो सकते हैं और उन्हें समझाने का प्रयास करना चाहिए। बात करें और समाधान खोजने के लिए एक-दूसरे की चिंताओं को सुनें। उन चीजों को करें जो आपकी प्राथमिकता में नहीं रही है जैसे कि हर हफ्ते अपने बेडरूम की सफाई करें। लॉकडाउन के अनुभवों का फायदा उठाने की जरूरत है। बस, इसके लिए हमें अपना नजरिया बदलना होगा।

क्रेडिट : पेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
फोटो क्रेडिट : Wikimedia commons

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