बिहार को विकसित राज्य बनाने की परिकल्पना अगले पांच साल में साकार होगी : तारकिशोर

पटना, बिहार के उपमुख्यमंत्री सह वित्तमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने बृहस्पतिवार को कहा कि प्रदेश को एक विकसित राज्य बनाने की जो परिकल्पना हमारे नेता नीतीश कुमार ने की है वह आने वाले पांच साल में साकार होने वाली है।

विधानसभा में बृहस्पतिवार को बजट 2021-22 पर चर्चा के बाद सरकार की ओर से जवाब देते हुए तारकिशोर ने उक्त बात कही।

तारकिशोर ने कहा, ‘‘मैंने अपने भाषण में 2005 और 15 साल (राजद शासन काल) बनाम 15 साल (राजग शासनकाल) पर चर्चा नहीं की थी क्योंकि इस बजट में भविष्य के आत्मनिर्भर बिहार की रूप रेखा प्रस्तुत की गयी है पर नेता प्रतिपक्ष ने 15 साल बनाम 15 साल का आईना दिखाकर उसके आंकउ़े पेश करने पर मजबूर किया है।’’

उन्होंने कहा कि जब हम आईने की बात करते हैं, जिसकी चर्चा प्रतिपक्ष के नेता ने की है, तो आपके आईने में जर्जर सड़कें, सदर अस्पताल के बिस्तरों पर सोते जानवर और पुलों की जगह चचरी नजर आते हैं।

तारकिशोर ने कहा कि 2005-06 में राज्य योजना कुल बजट का 19 प्रतिशत एवं योजना आकार कुल बजट का 21 प्रतिशत था। किसी भी राज्य का विकास योजना मद में प्रावधानित राशि से होता है ऐसे में केवल 21 प्रतिशत ही रखा जाए तो राज्य का क्या विकास होगा?

उन्होंने कहा कि 2020-21 में योजना मद कुल बजट का 50 प्रतिशत है। ऐसे में इस सदन को 50 प्रतिशत बनाम 21 प्रतिशत पर चर्चा करनी चाहिए ना कि आंकडों का जंजाल प्रस्तुत कर राज्य के विकास पर संदेह व्यक्त करना चाहिए।

बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव द्वारा वित्तीय वर्ष 2021-22 के बजट पर चर्चा के दौरान इस बजट को लेकर सरकार द्वारा पुस्तिका में वर्णित पिछड़ा, अतिपिछड़ा, अनुसूचित जाति-जनजाति एवं अल्पसंख्यक विभाग से संबंधित आंकड़ों को उद्धरित करते हुए उसपर प्रश्न उठाए जाने की ओर इशारा करते हुए तारकिशोर ने उसे पूरी तरह से भ्रामक और गुमराह करने वाला बताया।

तारकिशोर ने कहा कि नीतीश कुमार ने बिहार के विकास को गढने का काम किया है। 15 साल के कुशल नेतृत्व ने बिहार को आज ऐसे मुकाम पर पहुंचाया है कि आज राज्य विकासशील बिहार विकसित की मंजिल के करीब पहुंच गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘विकसित राज्य की परिकल्पना जो हमारे नेता नीतीश कुमार ने की थी वह आने वाले पांच साल में साकार होने वाली है। हम जो सपना देखते हैं उसे मूर्त रूप देते हैं। हम बकरी चराने वालों, सुअर चराने वालों बोलकर उन्हें ऐसे सपने दिखाकर उनके विकास को अवरूद्ध नहीं करते। हमारी सरकार ने समाज के सभी तबकों के लिए चाहे वह कमजोर वर्ग, अल्पसंख्यक या महिला वर्ग हो सभों के लिए जो कार्यक्रम तय किया है उसी का परिणाम है कि आज हमारी मुनिया साईकिल की घंटी बजाते हुए स्कूल जाती है। यह एक दिन में नहीं हुआ है।’’

क्रेडिट : पेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया

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