भारत का अगला मंगल अभियान एक ‘ऑर्बिटर’ होने की संभावना

नयी दिल्ली, शुक्रवार तड़के नासा का रोवर ‘पर्सवियरन्स’ मंगल की सतह पर सफलतापूर्वक उतर गया। वहीं, भारतीय अंतरिक्ष अनुंसधान संगठन (इसरो) का ‘लाल ग्रह’ पर अगला अभियान एक ‘ऑर्बिटर’ होने की संभावना है। ‘पर्सवियरन्स’ जेजोरो क्रेटर (महाखड्ड) में उतरा है। यह नासा द्वारा अब तक भेजा गया सबसे बड़ा और सर्वाधिक उन्नत रोवर है।

इसरो ने अपने सफल ‘‘मार्स ऑर्बिटर मिशन’’ (मंगलयान) ने ‘‘मार्स ऑर्बिटर मिशन-2’’ की अपनी अगली योजना की घोषणा की है। इसके मुताबिक, ‘‘अब उसकी योजना भविष्य के प्रक्षेपण के अवसर तलाशने के लिए मंगल पर एक ऑर्बिटर मिशन भेजने की है। ’’

हालांकि, कुछ अन्य बड़ी परियोजनाएं भी कतार में हैं। मंगलयान की सफलता के बाद इसरो ने शुक्र ग्रह पर भी अभियान भेजने का फैसला किया है। बहरहाल, इसरो की तत्काल प्राथमिकता चंद्रयान-3 और गगनयान है। इन दोनों परियोजनाओं में कोरोना वायरस महामारी के कारण लागू लॉकडाउन के चलते देर हुई है।

चंद्रयान -3 के तहत इसरो एक बार फिर एक रोवर चंद्रमा की सतत पर उतारेगा। अभियान इस साल के अंत में भेजा जाएगा।

चंद्रयान-2, भारत की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा था।

इसरो की योजना 2022 तक गगनयान मिशन के तहत अंतरिक्ष में तीन अंतरिक्ष यात्रियों को भी भेजने की है।

क्रेडिट : पेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया

अंतरिक्ष सहयोग के लिए भारत-फ्रांस संयुक्त दृष्टिपत्र में भी मंगल ग्रह के लिए संभावित सहयोग का उल्लेख किया गया है।

मंगलयान, किसी दूसरे ग्रह पर पहुंचने वाला भारत का पहला अंतरिक्ष अभियान था। इसने हजारों की संख्या में तस्वीरें भेजी हैं। 

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