मंदी के समय निजीकरण का खयाल डरावना: प्रणब सेन

नयी दिल्ली, भारत के सांख्यिकी विभाग के पूर्व प्रमुख प्रणब सेन ने बुधवार को कहा कि मंदी के दौर में केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (सीपीएसई) के निजीकरण का विचार एक ‘डरावना विचार है।’

उन्होंने कहा कि यह इसलिए गलत समय है क्योंकि इससे मौजूदा जरूरतों को पूरा करने की वित्तीय क्षेत्र की क्षमता और कम हो जाती है।

उद्योग मंडल पीएचडी द्वारा आयोजित एक चर्चा में सेन ने यह भी कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वर्ष 2021-22 के अपने बजट भाषण में रोजगार शब्द का उल्लेख एक बार भी नहीं किया।

उन्होंने कहा कि निजीकरण के लिए सबसे अच्छा समय वह है जब अर्थव्यवस्था तेजी पर हो, ‘‘ मंदी में निजीकरण का ख्याल डरावना है।’’

गौरतलब है कि सरकार ने बजट में अगले वित्त वर्ष के दौरान विनिनवेश और निजीकरण से 1.75 लाख करोड़ रुपए के संसाधन जुटाने का लक्ष्य रखा है ।

वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में अगले वित्त वर्ष में सरकारी क्षेत्र के दो बैंकों और एक साधारण बीमा कंपनी को बेचने की भी घोषणा की है। पर बजट भाषण में उनके नाम नहीं बताए गए हैं।

सेन ने कहा, ‘‘कहने का मतलब यह है कि जो समय चुना गया है वह गलत है क्योंकि इससे वित्तीय क्षेत्र की वैध वास्तविक जरूरत को पूरा करने की क्षमता और घट जाएगी।

हालांकि उन्होंने पारदर्शी बजट पेश करने को लेकर सरकार की सराहना की।

क्रेडिट : पेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया

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