विदेशी टीकों के क्लिनिकल ट्रायल में छूट देने को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर

नयी दिल्ली, दिल्ली उच्च न्यायालय में मंगलवार को एक जनहित याचिका दायर कर केंद्र को विदेशी टीकों के क्लिनिकल ट्रायल में छूट देने के निर्देश देने का अनुरोध किया गया है ताकि बिना देरी के वे इस्तेमाल के लिए उपलब्ध हो और साथ ही उन लोगों को टीका लगाने में प्राथमिकता मिले जिन्होंने टीके की पहली खुराक ले ली है।

मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की खंडपीठ ने कहा कि इस मामले पर अब 13 मई को सुनवाई होगी क्योंकि याचिका में जिन मुद्दों को उठाया गया है उन पर पहले ही उच्चतम न्यायालय में सुनवाई चल रही है और उसने 30 अप्रैल को इस पर विस्तृत आदेश भी पारित किया था।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से पेश केंद्र सरकार के स्थायी वकील अनुराग अहलुवालिया ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने इसी मामले पर सुनवाई चल रही है और उसने इस संबंध में केंद्र को निर्देश जारी किए हैं। इसके बाद अदालत में मामले की सुनवाई स्थगित करने का फैसला किया।

अहलुवालिया ने पीठ को यह भी बताया कि उच्चतम न्यायालय 10 मई को इस मामले पर फिर से सुनवाई करेगा।

एक वकील द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि भारत को कोविशील्ड के निर्माता सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और कोवैक्सीन निर्माता भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड पर ही निर्भर नहीं रहना चाहिए क्योंकि वह हर किसी के लिए टीका नहीं बना सकेंगे और इसलिए विदेशी टीकों के इस्तेमाल की भी मंजूरी देनी चाहिए।

याचिकाकर्ता नाजिया परवीन ने अदालत से केंद्र और दिल्ली सरकार को यह निर्देश देने का भी अनुरोध किया कि वह और टीकाकरण केंद्र बनाएं और सुव्यवस्थित टीकाकरण के लिए बुनियादी ढांचा बनाएं।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील संजीव सागर ने अदालत को बताया कि टीके की पहली खुराक लेने और दूसरी खुराक लेने वाले लोगों की संख्या में काफी अंतर है।

उन्होंने कहा कि टीकाकरण में उन लोगों को पहले प्राथमिकता मिलनी चाहिए जो टीके की पहली खुराक ले चुके हैं।

क्रेडिट : पेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
फोटो क्रेडिट : Wikimedia commons

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