स्वतंत्र एवं मुक्त हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए सहयोगियों के साथ मिलकर काम करने का उदाहरण है ‘क्वाड’ : अमेरिका

वाशिंगटन, बाइडन प्रशासन ने मंगलवार को कहा कि ‘क्वाड’ स्वतंत्र एवं मुक्त हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए भारत सहित अमेरिका के निकटतम सहयोगियों के साथ मिलकर काम करने का एक उदाहरण है।

‘क्वाड’ चार देशों- ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और अमेरिका का एक अनौपचारिक सुरक्षा समूह है। इसका लक्ष्य सामरिक रूप से महत्वपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र को एक स्वतंत्र एवं मुक्त क्षेत्र सुनिश्चित करना है, जहां हाल के वर्षों में चीनी सेना के दखल में वृद्धि देखी जा रही है।

अमेरिका के विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘मैं कहना चाहूंगा कि क्वाड, स्वतंत्र एवं मुक्त हिंद-प्रशांत क्षेत्र के हित में अमेरिका और भारत सहित हमारे करीबी भागीदारों के बीच सहयोग का एक उदाहरण है।’’

प्राइस ने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के दखल से उत्पन्न स्थिति वैश्विक शक्तियों के बीच बातचीत का एक प्रमुख बिंदु है।

दक्षिण और पूर्वी चीन सागर में चीन के दावों ने विवाद बढ़ाने का काम किया है और बीजिंग ने पिछले कुछ वर्षों में मानव निर्मित अपने कृत्रिम द्वीपों पर भी सैन्य गतिविधि में काफी इजाफा किया है।

दक्षिण चीन सागर एवं पूर्वी चीन सागर में खनिज, तेल एवं अन्य प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता है।

चीन समूचे दक्षिण चीन सागर पर अपना अधिकार जताता है जबकि वियतनाम, मलेशिया, फिलीपीन, ब्रुनेई और ताइवान भी इसपर अधिकार जताते हैं। पूर्वी चीन सागर में जलक्षेत्र को लेकर चीन का जापान से विवाद चल रहा है।

प्राइस ने कहा, ‘‘हम क्वाड को गतिशील और महत्वपूर्ण क्षमता के रूप में देखते हैं तथा यही कारण है कि हम समुद्री सुरक्षा के साथ ध्यान दिए जाने वाले अन्य क्षेत्रों में सहयोग प्रगाढ़ कर रहे है। इसके साथ ही मौजूदा समय को परिभाषित करने वाले मुद्दों पर भी हम क्वाड के सहयोगियों के साथ काम कर रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि इसमें कोविड-19 महामारी और जलवायु जैसे विषय भी शामिल हैं।

इन खबरों के बारे में पूछे गए सवाल पर कि जो बाइडन प्रशासन ‘क्वाड’ शिखर सम्मेलन पर काम कर रहा है, प्राइस ने कहा, ‘‘इस समय घोषणा करने के लिए हमारे पास कुछ नहीं है।’’

क्रेडिट : पेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया

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