स्वेज नहर में परिवहन बाधित होने से वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है दबाव

मिस्र के स्वेज नहर में बड़ी संख्या में फंसे जहाजों से वैश्विक व्यापार पर कुछ हद तक दबाव बढ़ सकता है। एक साल पहले कोविड-19 महामारी संबंधी बाधाओं के कारण आपूर्ति व्यवस्था बुरी तरीके से प्रभावित हुई थी और अब स्वेज नहर मार्ग बाधित होने से इस पर असर पड़ने की आशंका है।

स्वेज नहर में फंसे जहाज एवर ग्रीन को सोमवार को तड़के ज्वार उठने का लाभ लेकर ‘टगबोट’ (रस्सा खींचने वाले जहाजों) के जरिये सतह पर दोबारा लाने में ‘आंशिक’ सफलता मिली। लेकिन यह अभी साफ नहीं है कि इस जहाज को हटाने और मार्ग को पूर्ण रूप से खोलने में कितना समय लगेगा। यह जहाज एक लेन वाले जल-मार्ग में करीब एक सप्ताह से फंसा है। जिसकी वजह से कई जहाज अटके पड़े हैं।

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि स्वेज नहर में पोत परिवहन बाधित होने से वैश्विक व्यापार पर संभवत: कुछ हफ्तों से अधिक समय तक प्रभाव नहीं पड़ेगा। इस साल वैश्विक वृद्धि में जो सुधार देखने को मिल रहा है, इस समयस्या के कारण उसके बाधित होने की आशंका कम है क्योंकि टीकाकरण अभियान और अर्थव्यवस्था को दोबारा से खोले जाने से लोगों में एक भरोसा पैदा हुआ है।

मिलकेन इंस्टीट्यूट के मुख्य अर्थशास्त्री विलियम ली ने कहा कि लेकिन उन कंपनियों के लिये सतर्क रख अपनाने की जरूरत है जो आपूर्ति व्यवस्था पर भरोसा कर रहे हैं। उनके लिये सतर्क रहने की जरूरत है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह बताता है कि हमारी आपूर्ति श्रृंखला कितना नाजुक है….।’’

ली ने कहा कि आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने से कारखानों में एसेंबली लाइन को बंद करना पड़ सकता है। इसका बड़ा प्रभाव होगा।

पिछले साल कई देशों को उस समय सबक मिला जब चीन में कोरोना वायरस संक्रमण आने के कारण कारोबार प्रभावित हुआ।

आपूर्ति व्यवस्था बाधित होने से कई कारखाने बंद हुए और चीन के प्रांतों के बीच व्यापार थम गया। दवाओं की आपूर्ति, मास्क और अन्य चिकित्सा सामानों की आपूर्ति हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो गया था और कई बार यह असंभव दिखा।

जहाज स्वेज नहर मार्ग से बचने के लिये दक्षिण अफ्रीका के ‘केप ऑफ गुड होप’ का रास्ता अपना रहे हैं। इससे कंटेनरों के गंतव्यों तक पहुंचने और वहां से दूसरे सामान अन्य जगहों को ले जाने में समय लगेगा। इससे लागत बढ़ेगी और अंतत: इसका भार ग्राहकों को उठाना पड़ेगा।

पीटरसन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल एकोनॉमिक्स के वरिष्ठ फेलो गैरी हफबेयर ने कहा, ‘‘पोत से सामान ढुलाई का खर्चा बढ़ने जा रहा है। इससे आपूर्ति व्यवस्था थोड़ी तंग होगी और उपभोक्ताओं के स्तर पर सामान की कमी हो सकती है। इससे खासकर तेल की कीमत चढ़ेगी।’’

इसके अलावा एशिया में कंटेनरों की कमी भी समस्या को बढ़ा रही है। कंटेनरों की कमी का मतलब है कि खुदरा विक्रेताओं को टीवी, फर्नीचर, कपड़े, वाहनों के कल-पुर्जे और अन्य दूसरे उन सामानोंको प्राप्त करने में समय लग सकता है जिनकी आपूर्ति कंटेनरों के जरिये होती है।

आधिकारिक आंकड़े के अनुसार स्वेज नहर से मात्रा के हिसाब से दुनिया का करीब 12 प्रतिशत व्यापार होता है। लेकिन जहाजों के जरिये माल ढुलाई के दैनिक परिवहन के आधार पर इसकी हिस्सेदारी 30 प्रतिशत है। इस लिहाज से यूरोप और एशिया के बीच व्यापार के लिये महत्वपूर्ण मार्ग है। पिछले साल नहर से करीब 19,000 जहाज गुजरे थे।

क्रेडिट : पेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
फोटो क्रेडिट : Wikimedia commons

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