1962 के बाद से पीएलए द्वारा अरूणाचल में कब्जा की गई जमीन के आकलन के लिए समिति बने:तापिर गाव

नयी दिल्ली : अरूणाचल से भाजपा सांसद तापिर गाव ने रविवार को मांग की कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के नेतृत्व में एक समिति गठित की जाए, जो यह आकलन करे कि 1962 के बाद से पीएलए द्वारा राज्य की कितनी जमीन कब्जा की गई।

लोकसभा में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए तापिर गाव ने कहा कि अरूणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) नहीं है, वहां मैकमोहन रेखा है।

उन्होंने कहा कि 1914 में अंग्रेज हेनरी मैकमोहन और दलाई लामा के प्रतिनिधि ने शिमला में एक समझौते पर हस्ताक्षर किया था ।

उन्होंने कहा कि उस समय वहां चीन नहीं था ।

बहरहाल, इस दौरान एक सदस्य को बोलने के लिये निर्धारित समय समाप्त होने के कारण तापिर का माइक बंद कर दिया गया। हालांकि, कुछ ही देर बाद उनका माइक फिर से ऑन कर दिया गया। इसके बाद भाजपा सांसद ने बिरला के नेतृत्व में समिति गठित करने की मांग की ।

उन्होंने कहा, ‘‘ आपके (बिरला) नेतृत्व में एक समिति बनाई जानी चाहिए, जो यह आकलन करे कि 1962 के बाद से चीन की पीएलए (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) ने कितने वर्ग किलोमीटर जमीन पर कब्जा किया है । ’’ शून्यकाल में हिस्सा लेते हुए भाजपा के सुबोध पाठक ने बालीवुड में कथित तौर पर साम्प्रदयिकता बढ़ने की बात कही ।

उन्होंने देश के कई क्षेत्रों में लव जिहाद और धर्मांतरण बढ़ने का मुद्दा भी उठाया और लव जिहाद को रोकने के लिये सख्त कानून बनाने की मांग की ।

वहीं, जदयू के दुलाचंद गोस्वामी ने कटिहार में एक सैनिक स्कूल खोलने की रक्षा मंत्री से मांग की ।

बसपा के राम शिरोमणि ने मनरेगा मजदूरों और किसानों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण किसानों और मजदूरों की कमर टूट गई है। उन्होंने कहा कि ऐसे में कृषि कार्यों में मनरेगा मजदूरों को शामिल किया जाए ।

भाजपा के दुर्गा दास ने अपने क्षेत्र में एक केंद्रीय विद्यालय खोलने की केंद्रीय शिक्षा मंत्री से मांग की।

रविवार को शून्यकाल साढ़े 12 बजे तक चला, जिसमें सदस्यों ने लोक महत्व के विषय उठाये । (भाषा)

क्रेडिट : पेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया

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