निजता के मुद्दे पर यूरोपीय संघ के किसी भी देश के नियामक के प्रति जवाबदेह होगी फेसबुक : ईयू अदालत

लंदन, यूरोपीय संघ (ईयू) की शीर्ष अदालत ने मंगलवार को व्यवस्था दी कि फेसबुक निजता चुनौतियों के मुद्दे पर सिर्फ आयरलैंड स्थित अग्रणी नियामक के प्रति ही नहीं, बल्कि संघ के प्रत्येक सदस्य देश के नियामक के प्रति जवाबदेह होगी।

अदालत के निर्णय का अन्य कंपनियों पर भी प्रभाव हो सकता है।

यूरोपीय संघ के कड़े निजता नियमों ‘सामान्य आंकड़ा संरक्षण नियमन’ (जीडीपीआर) के तहत केवल एक देश के राष्ट्रीय आंकड़ा सुरक्षा प्राधिकरण को सीमा पार संबंधी शिकायतों से संबंधित कानूनी मामलों को देखने का अधिकार है।

डबलिन आधारित फेसबुक के मामले में यह आयरलैंड का आंकड़ा सुरक्षा आयोग है।

हालांकि ‘यूरोपियन यूनियंस कोर्ट ऑफ जस्टिस’ ने व्यवस्था दी कि ‘‘निश्चित स्थितियों के तहत’’ किसी भी सदस्य देश के नियामक के पास जीडीपीआर उल्लंघन पर कंपनी को अदालत में ले जाने का अधिकार है, चाहे यह अग्रणी नियामक न हो।

अदालत के इस निर्णय से फेसबुक और बेल्जियम के आंकड़ा सुरक्षा प्राधिकरण के बीच क्षेत्राधिकार को लेकर लंबे समय से चली आ रही कानूनी लड़ाई का अंत हो गया है जो इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के व्यवहार पर नजर रखने के लिए सोशल मीडिया मंच द्वारा कुकीज के इस्तेमाल पर केंद्रित थी।

कंपनी की दलील थी कि 2018 में जीडीपीआर के प्रभाव में आने के बाद मामले में बेल्जियम के नियामक का कोई क्षेत्राधिकार नहीं है।

इस बीच, फेसबुक ने अदालत के निर्णय को अपनी जीत करार दिया और कहा कि व्यवस्था के तहत सीमित परिस्थितियों को छोड़कर आयरलैंड स्थित नियामक अग्रणी बना रहेगा।

कंपनी के एसोसिएट जनरल काउंसल जैक गिलबर्ट ने कहा, ‘‘हमें खुशी है कि यूरोपीय संघ की शीर्ष अदालत ने एकल तंत्र के मूल्यों और सिद्धांतों को बरकरार रखा है।’’

एपल, ट्विटर, गूगल और इंस्टाग्राम सहित अन्य कंपनियों से संबंधित जीडीपीआर उल्लंघन के बढ़ते मामलों के समाधान में लंबा समय लेने के कारण आयरलैंड स्थित नियामक की आलोचना होती रही है।

क्रेडिट : पेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
फोटो क्रेडिट : Wikimedia commons

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