पिछले दो-तीन वर्षों में अरावली की हजारों हेक्टेयर भूमि पर पारिस्थितिकी को बहाल किया: भूपेंद्र यादव

नयी दिल्ली, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि पिछले दो से तीन वर्षों में अरावली की हजारों हेक्टेयर भूमि पर पारिस्थितिकी को बहाल किया गया और सरकार पारिस्थितिकी को विकास के केंद्र में रखते हुए इस कार्य को जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

मंत्री ने यहां ‘नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन इको-रिस्टोरेशन ऑफ द अरावली लैंडस्केप: स्ट्रेंथनिंग द अरावली ग्रीन वॉल’ में अपने उद्घाटन भाषण के दौरान यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा “सरकार अरावली पर्वतमाला और देशभर में इसी तरह के अन्य पारिस्थितिक तंत्रों के संरक्षण व उन्हें बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध है। पिछले दो-तीन वर्षों में अरावली क्षेत्र में हजारों हेक्टेयर भूमि पर पारिस्थितिक को बहाल किया गया और सरकार विकास के केंद्र में इसी को रखते हुए इस कार्य को जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है।”

यादव ने कहा कि सरकार ने ‘अरावली ग्रीन वॉल’ परियोजना शुरू की है। यह परियोजना संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम अभिसमय (यूएनसीसीडी) के तहत भारत की उस प्रतिबद्धता का हिस्सा है जिसके तहत 2030 तक 2.6 करोड़ हेक्टेयर खराब हो चुकी भूमि पर पारिस्थितिक को बहाल किया जाएगा। मंत्री ने कहा “इस पहल के तहत अरावली क्षेत्र में 64.5 करोड़ हेक्टेयर बंजर भूमि की पहचान की गई है और गुजरात दिल्ली हरियाणा और राजस्थान में 27 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में हरियाली का काम शुरू किया गया है। अरावली के 29 जिलों के वन मंडल अधिकारी इस परियोजना को लागू कर रहे हैं। इसमें सूखे इलाकों के अनुकूल देसी पौधों का रोपण किया जा रहा है।’’

मंत्री की ये टिप्पणियां उस विवाद के कुछ हफ्तों बाद आई हैं जब अक्टूबर में पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला अरावली की सुरक्षा के लिए इसकी परिभाषा बदलने की सिफारिश की थी। नवंबर में उच्चतम न्यायालय ने इन सिफारिशों को स्वीकार कर लिया लेकिन 29 दिसंबर को आदेश को स्थगित कर दिया।क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडियाफोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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