अनाहत ने ओलंपिक में पदक हासिल करने के लिए हार्वर्ड में पढ़ाई करने की योजना टाली

नयी दिल्ली, विश्व जूनियर चैंपियन स्क्वाश खिलाड़ी अनाहत सिंह ने खुलासा किया है कि उन्होंने 2028 के लॉस एंजिलिस ओलंपिक में पदक जीतने के लिए तैयारियों को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष प्रतिष्ठित हार्वर्ड विश्वविद्यालय में पढ़ाई करने की योजना फिलहाल टाल दी है।

अनाहत भी अपनी बड़ी बहन अमीरा के नक्शेकदम पर चलकर हार्वर्ड में उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहती है। लेकिन अपने पांचवें और अंतिम प्रयास में विश्व जूनियर चैंपियन बनने के बाद यह 18 वर्षीय खिलाड़ी अपना सारा ध्यान इस साल होने वाले एशियाई खेलों और 2028 में होने वाले ओलंपिक खेलों की तैयारी में लगाना चाहती है। अनाहत ने पीटीआई से कहा ‘‘मुझे इस साल कॉलेज जाना था लेकिन एशियाई खेलों के कारण मैंने एक साल का ब्रेक लेने का फैसला किया।

अब मुझे समझ आ गया है कि लॉस एंजिलिस में होने वाले ओलंपिक खेलों की तैयारियों के लिहाज से यह साल मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है।’’ उन्होंने कहा ‘‘मेरे कहने का मतलब यह है कि मैं इस साल पढ़ाई के बजाय अपने खेल पर ध्यान देना चाहती हूं। मैं इस साल सिर्फ स्क्वाश पर ध्यान केंद्रित कर रही हूं और यह सुनिश्चित करना चाहती हूं कि ओलंपिक में भाग लेने से पहले मैं अपने चरम पर रहूं।’’

विश्व जूनियर चैंपियन बनने के बाद अनाहत का लक्ष्य अब सितंबर-अक्टूबर में जापान में होने वाले एशियाई खेल हैं। एशियाई खेलों में अगर अनाहत को स्वर्ण पदक जीतना है तो उन्हें मलेशिया की विश्व में पांचवें नंबर की खिलाड़ी शिवसंगारी सुब्रमण्यम और जापान की छठे नंबर की खिलाड़ी सतोमी वतनबे जैसी खिलाड़ियों पर जीत दर्ज करने के तरीके खोजने होंगे।

एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने पर वह ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर जाएगी। उन्होंने कहा ‘‘विश्व जूनियर चैंपियन बनने से मेरा आत्मविश्वास काफी बढ़ा है। मेरे कहने का मतलब है कि अगर मैं नहीं जीत पाती तो तब भी बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ना था लेकिन इस जीत से निश्चित तौर पर मैं काफी उत्साहित हूं।’’

अनाहत ने कहा ‘‘मैं एशियाई खेलों में भाग लेने वाली लगभग प्रत्येक खिलाड़ी के खिलाफ खेल चुकी हूं। मैं अब अपना पूरा ध्यान इस पर केंद्रित करना चाहती हूं। अगर मुझे ओलंपिक में खेलने का मौका मिलता है तो यह सपना सच होने जैसा होगा।’’ अनाहत ने रैकेट खेलों में अपना सफर बैडमिंटन से शुरू किया और बाद में स्क्वाश को अपनाया।

मिस्र लंबे समय से स्क्वाश में अपना दबदबा बनाए हुए है लेकिन अनाहत को पेशेवर सर्किट में उस देश के खिलाड़ियों के खिलाफ खेलते समय कोई अतिरिक्त दबाव महसूस नहीं होता। उन्होंने क्वार्टर फाइनल सेमीफाइनल और फाइनल में मिस्र की खिलाड़ियों का सामना किया और जीत हासिल की।क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

%d bloggers like this: