अरुंधति और श्री चरणी का सपना भारत के वैश्विक खिताबी सूखे को खत्म करना

नयी दिल्ली, भारतीय तेज गेंदबाज अरुंधति रेड्डी और युवा स्पिनर श्री चरणी का सपना घरेलू सरजमीं पर मंगलवार से शुरू होने वाले वनडे विश्व कप को जीतकर भारत के वैश्विक खिताबी सूखे को खत्म करना है।

             महान सचिन तेंदुलकर और महेंद्र सिंह धोनी से प्रेरणा लेने वाली अरुंधति बचपन में विकेटकीपर बनना चाहती थी लेकिन कोच की सलाह पर उन्होंने गेंदबाजी शुरू की तो वहीं एथलेटिक्स और बैडमिंटन जैसे खेलों में अच्छा करने वाली श्री चरणी के लिए क्रिकेट से जुड़ने का फैसला सही साबित हुआ।

              महिला वनडे विश्व कप का आगाज 30 सितंबर को गुवाहाटी में भारत बनाम श्रीलंका मैच से होगा।

             अरुंधति भारतीय पुरुष टीम की 2007 में टी20 विश्व कप और फिर 2011 में वनडे विश्व कप की जीत से प्रेरणा लेती है।

             हैदराबाद की इस 28 साल की खिलाड़ी ने ‘जियो हॉटस्टार’ से कहा  ‘‘सच कहूं तो भारत ने जो 2007 का टी20 विश्व कप जीता था  उसने मुझे क्रिकेट खेलना शुरू करने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद महान सचिन तेंदुलकर कर मौजूदगी में 2011 में घरेलू सरजमीं पर विश्व कप की जीत ने मुझ पर गहरी छाप छोड़ी।’’

             अरुंधति ने कहा  ‘‘मैंने बचपन से ही भारत के लिए खेलना और विश्व कप जीतना चाहती हूं। अब जब मुझे घर पर 50 ओवर का विश्व कप खेलने का मौका मिला है तो मैं इस मौके लिए भगवान की आभारी हूं।’’

             अरुंधति हालांकि इंग्लैंड के खिलाफ अभ्यास मैच में चोटिल हो गयी थी और उनकी चोट की गंभीरता के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है।

             धोनी को अपना आदर्श मानने वाली अरुंधति ने बताया कि वह शुरुआत में विकेटकीपर बनना चाहती थीं।

            उन्होंने क्रिकेट से जुड़ी शुरूआती दिनों को याद करते हुए कहा  ‘‘मैं कभी तेज गेंदबाज नहीं बनना चाहती थी। मैं हमेशा विकेटकीपर बनना चाहती थी।’’

             अरुंधति ने कहा  ‘‘कोच गणेश सर की अकादमी में पहले दिन ही मुझे गेंदबाजी करने के लिए कहा गया। मैंने मां से कहा कि मुझे गेंदबाजी नहीं करनी है और मैं विकेटकीपर बनना चाहती हूं।’’

             उन्होंने कहा  ‘‘ इसके बाद मेरी मां ने कोच से बात की और उन्होंने मां को भरोसा दिया कि मुझे में मध्यम गति की गेंदबाज बनने की काबिलियत है। इस तरह तेज गेंदबाज के रूप में मेरी यात्रा शुरू हुई।’’

             इक्कीस वर्षीय एन श्री चरणी ने अपने चाचा किशोर रेड्डी के साथ कडप्पा जिले के रायलसीमा थर्मल पावर स्टेशन क्वार्टर में शौकिया तौर पर क्रिकेट खेलना शुरू किया था। वह बचपन में एथलेटिक्स  खो-खो और बैडमिंटन जैसे खेलों में काफी अच्छी थी लेकिन उनका झुकाव क्रिकेट की ओर बढ़ता गया।

              क्रिकेट में उन्हें कोचों और पूर्व भारतीय चयनकर्ता एमएसके प्रसाद का मार्गदर्शन मिला।

             श्री चरणी ने कहा कि क्रिकेटर बनने के उनके फैसले को उनकी मां का पूरा समर्थन मिला लेकिन उनके पिता ने इसे स्वीकार करने में लगभग एक साल का समय लिया।

             उन्होंने कहा  ‘‘एक बार जब हम कडप्पा में एक जेवर की दुकान पर गए थे तो खचांजी ने मुझसे मेरे किट बैग के बारे में पूछा। मेरी मां ने जवाब दिया  ‘वह क्रिकेट खेलती है  और एक दिन वह भारत के लिए खेलेगी।’ वह पहली व्यक्ति थीं  जिन्होंने मुझ पर विश्वास किया।’’

             उन्होंने कहा  ‘‘हर कोई भारत के लिए और विश्व कप में खेलने का सपना देखता है। मैं इस अवसर को पाकर खुद को भाग्यशाली मानती हूं और मैं टीम और भारत के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की पूरी कोशिश करूंगी।’’

             तेज गेंदबाजी से स्पिन में बदलाव के बारे में श्री चरणी ने कहा  ‘‘ मैं शुरुआत में मध्यम गति की गेंदबाज थी लेकिन इसमें मैं ज्यादा प्रभावी नहीं हो रही थी फिर मैंने स्पिन गेंदबाजी में हाथ आजमाने का फैसला किया।’’

             श्री चरणी ने कहा  ‘‘जब मैंने स्पिन गेंदबाजी शुरू की तो मैंने लगातार विकेट लेना शुरू कर दिया क्योंकि बल्लेबाजों को मेरी गेंदों के खिलाफ संघर्ष करना पड़ा। इस तरह एक स्पिनर के रूप में मेरी यात्रा शुरू हुई।’’

क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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