आईसीई ने जब कार्रवाई तेज की, तब अमेरिकी श्रमिकों को कोई आर्थिक फायदा नहीं हुआ

वाशिंगटन, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लोगों से वादा किया था कि वे रोजगार और श्रम बाजार को बेहतर बनाएंगे। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए उन्होंने आव्रजन नीति और अमेरिकी इतिहास में सबसे बड़ा निर्वासन अभियान चलाने की योजना को अपने चुनाव प्रचार अभियान का मुख्य मुद्दा बनाया था।

             अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने जुलाई 2025 में ‘एक्स’ पर लिखा था  ‘‘वाशिंगटन ने लंबे समय तक इस बात को नजरअंदाज किया कि बड़ी संख्या में अवैध आव्रजन से पारिश्रमिक दरें कम बनी रहीं  जिसका सबसे अधिक नुकसान कामकाजी वर्ग के अमेरिकियों  खासकर युवाओं को हुआ।’’

            उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकाल में सीमा सुरक्षा मजबूत हुई है  कामकाजी/मजदूर वर्ग की आय बढ़ी है और व्यापारिक समझौतों के कारण बड़े पैमाने पर निवेश आ रहा है।

            हालांकि  श्रम बाजार एक अलग तस्वीर पेश करता है। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के पहले वर्ष में बेरोजगारी बढ़ी  नयी भर्तियों की रफ्तार धीमी पड़ गई और वेतन वृद्धि ठहर गई। निर्माण क्षेत्र विशेष रूप से इससे बुरी तरह प्रभावित हुआ।

            हम श्रम बाजार  आव्रजन और सार्वजनिक पर्यावरण नीति के विद्वान हैं  जिन्होंने यह अध्ययन किया है कि इन आर्थिक प्रवृत्तियों को ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के बड़े पैमाने पर चलाए गए निर्वासन अभियान से कैसे जोड़ा जा सकता है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि जिन क्षेत्रों में आईसीई (आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन) की अधिक सख्त कार्रवाई हुई  वहां प्रवासी श्रमिकों के रोजगार में गिरावट देखी गई  लेकिन अमेरिकी नागरिकों के रोजगार या वेतन में न तो कोई वृद्धि हुई और न ही सुधार हुआ।

            अक्टूबर 2023 से नवंबर 2025 तक के आंकड़ों का इस्तेमाल करते हुए  हमने उन स्थानों में प्रवासी और अमेरिका में जन्मे श्रमिकों की रोजगार दरों और वेतन का अध्ययन किया  जहां आईसीई द्वारा गिरफ्तारियों में अचानक वृद्धि हुई थी  और उनकी तुलना उन स्थानों से की जहां ऐसी वृद्धि नहीं हुई थी।

             जिन क्षेत्रों में अमेरिकी आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन ने अपनी गतिविधियां तेज कर दीं  वहां हमने उन संभावित अवैध प्रवासियों की रोजगार दर में उल्लेखनीय गिरावट पाई  जिन्हें न तो हिरासत में लिया गया था और न ही निर्वासित किया गया था।

             जिन उद्योगों में ऐसे श्रमिक (यहां प्रवासी/अवैध प्रवासी) बड़ी संख्या में काम करते हैं-जैसे कृषि  निर्माण  विनिर्माण और थोक बाजार—वहां रोजगार दर में चार प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।

            वर्ष 2025 की गर्मियों में किए गए एक प्यू रिसर्च सर्वेक्षण में  विदेशों में जन्म 43 प्रतिशत लोगों  ने कहा कि उन्हें अपने या अपने किसी करीबी के निर्वासन का डर है। हम इसे ‘चिलिंग इफेक्ट’ कहते हैं  क्योंकि ये लोग शारीरिक रूप से श्रम बाजार से बाहर नहीं किए गए हैं। इसके बजाय  उन्होंने आईसीई की वजह से अपना व्यवहार बदल दिया।

            सार्वजनिक स्थानों-जैसे सड़कों  कार्यस्थलों  अदालतों और स्कूल पार्किंग स्थलों में की गई गिरफ्तारियों का प्रतिशत दोगुने से भी अधिक हो गया  जो सभी गिरफ्तारियों के 19 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 50 प्रतिशत तक पहुंच गया।

             ट्रंप ने अपने 2024 के राष्ट्रपति चुनाव प्रचार अभियान के दौरान आईसीई की कार्रवाई को अपराधियों  विशेष रूप से हिंसक अपराधियों पर केंद्रित करने का वादा किया था। दरअसल  हमने पाया कि इस अवधि में आईसीई द्वारा गिरफ्तार किए गए उन प्रवासियों का हिस्सा  जिनका आपराधिक रिकॉर्ड था  लगभग रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया  जो जनवरी 2025 में लगभग 60 प्रतिशत से घटकर वर्ष के अंत तक 30 प्रतिशत से भी कम हो गया।

             इसका असर सिर्फ प्रवासी कामगारों पर ही नहीं पड़ा है  बल्कि आम लोगों ने भी अपने खर्च में कटौती कर दी है। अन्य शोधकर्ताओं ने पाया है कि 2025 में जिन शहरों में आईसीई की छापेमारी बढ़ाई गई  वहां उपभोक्ता खर्च और आर्थिक गतिविधियों में गिरावट आई।

            वहीं  एक अन्य विश्लेषण में पाया गया कि जिन राज्यों में आईसीई की प्रवर्तन कार्रवाई अधिक सख्त थी  वहां उन राज्यों की तुलना में जहां ऐसी सख्ती नहीं थी  लोगों ने क्रेडिट और डेबिट कार्ड से खर्च करना कम कर दिया और यह कमी लगभग 1.7 प्रतिशत तक पाई गई।

             शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि जहां आईसीई की कार्रवाई बढ़ी  वहां लोगों की पैदल आवाजाही भी काफी कम हो गई।   ट्रंप ने यह वादा किया था कि प्रवासियों को देश से बाहर भेजने से अमेरिकी नागरिकों के लिए अधिक नौकरियां मिलेंगी। जहां आईसीई की कार्रवाई ज्यादा थी  वहां अमेरिकी नागरिकों की नौकरियां भी कम हुईं। कंपनियों ने लोगों को आकर्षित करने के लिए वेतन नहीं बढ़ाया  बल्कि उन्होंने कर्मचारियों की भर्ती ही कम कर दी।असल सवाल यह है कि क्या प्रवासी और अमेरिकी नागरिक एक ही तरह की नौकरियों के लिए सीधे मुकाबला करते हैं। लेकिन ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में स्थिति अलग है। अर्थशास्त्रियों के अनुसार  नौकरी का बाजार ऐसा नहीं है कि एक की नौकरी मिलने से दूसरे की नौकरी जरूर छिन जाए। प्रवासी और अमेरिकी कामगार अक्सर अलग-अलग लेकिन एक-दूसरे से जुड़े काम करते हैं  न कि एक ही काम के लिए सीधी प्रतिस्पर्धा करते हैं।

             हमारे नए शोध के अनुसार  बड़ी संख्या में प्रवासियों को देश से निकालने से अमेरिकी नागरिकों को नयी नौकरियां नहीं मिलतीं। इसलिए जो राष्ट्रपति रोजगार बढ़ाना चाहते हैं  उन्हें इसके लिए दूसरे तरीके अपनाने होंगे।

क्रडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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