ईरान में अमेरिकी हमलों में युद्ध अपराध के उचित आधार मिले: मानवाधिकार विशेषज्ञ

जिनेवा, संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष मानवाधिकार संस्था की ओर से नियुक्त मानवाधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि उन्हें इस बात को मानने के ‘‘उचित आधार’’ मिले हैं कि अमेरिका ने ईरान में दो हमलों में युद्ध अपराध किये। इन हमलों में दक्षिणी शहर मिनाब के एक स्कूल पर किया गया हमला भी शामिल है। ईरान पर गठित अंतरराष्ट्रीय तथ्यान्वेषण मिशन का कहना था कि ये निष्कर्ष दो हवाई हमलों पर केंद्रित हैं जिनमें महिलाओं और बच्चों समेत कम से कम 178 नागरिकों की मौत हुई थी।

मिशन ने कहा कि आम नागरिक ‘‘अपनी ही सरकार द्वारा किए जा रहे मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन और मानवता के खिलाफ अपराधों तथा अमेरिका और इजराइल के साथ देश के भीषण संघर्ष’’ के बीच फंसे गये। ‘एसोसिएटेड प्रेस’ की खबर के अनुसार फरवरी में युद्ध शुरू होने के समय अमेरिका की कम से कम एक मिसाइल मिनाब में स्थित शजरे तय्यबे पर गिरी थी। घटना में वास्तव में क्या हुआ इसका अभी तक कोई अंतिम ब्योरा सामने नहीं आया है। ईरान के सरकारी मीडिया ने हालांकि कहा है कि इस हमले में 168 लोग मारे गए जिनमें ज्यादातर बच्चे थे।

तथ्यान्वेषण टीम ने एक बयान में कहा ‘‘28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद मिशन ने इस बात को मानने के उचित आधार पाए कि अमेरिका ने हमले करने का युद्ध अपराध किया जिसके परिणामस्वरूप नागरिकों की मौतें हुईं या घायल हुए और नागरिक ठिकानों को नुकसान हुआ।’’ ट्रंप प्रशासन ने अभी तक प्रत्यक्ष तौर पर इसकी जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की है और न ही स्कूल पर हुए बम हमले की जांच के निष्कर्ष जारी किए हैं। संयुक्त राष्ट्र समर्थित टीम ने दो हमलों को लेकर युद्ध अपराधों के आरोपों का उल्लेख किया।

इनमें से एक हमला स्कूल पर टॉमहॉक मिसाइलों से किया गया था। वहीं दूसरा हवाई हमला 28 फरवरी को ही दक्षिणी शहर लामेर्द में किया गया। संयुक्त राष्ट्र समर्थित टीम ने कहा कि इस हमले में 22 पुरुषों और महिलाओं की मौत हुई थी। ‘अमेरिकी सेंट्रल कमांड’ ने लामेर्द पर किए गए हमले की जिम्मेदारी लेने से इनकार किया है। टीम ने ईरानी सरकार द्वारा मानवता के खिलाफ अपराध किए जाने का भी आरोप लगाया।क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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