उच्चतम न्यायालय ने दुर्घटना के बाद मिले मुआवजे पर कर लगाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका खारिज की

नयी दिल्ली, उच्चतम न्यायालय ने सड़क दुर्घटना के पीड़ित को मिले मुआवजे की राशि पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स लगाने का प्रावधान हटाने के लिए दायर जनहित याचिका पर विचार करने से शुक्रवार को इंकार कर दिया।

न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना की पीठ ने एक अधिवक्ता की याचिका खारिज करते हुए कहा कि वह इस मामले से ‘‘ व्यक्तिगत रूप से व्यथित नहीं हैं।’’

पीठ ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता व्यक्तिगत रूप से मोटरदुर्घटना दावा अधिकरण द्वारा तय की गई मुआवजे की राशि से व्यथित नहीं है। इस प्रकृति की चुनौती देनी वाली याचिका प्रभावित व्यक्ति द्वारा दाखिल की जानी चाहिए। जनहित याचिका के रूप में दाखिल इस याचिका पर सुनवाई करने का हम कोई कारण नहीं देखते हैं।’’

शीर्ष अदालत ने हालांकि, स्पष्ट किया कि वह याचिका में उठाए गए कानूनी सवाल को लेकर कोई राय व्यक्त नहीं कर रही है।

न्यायालय अधिवक्ता अमित साहनी की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें 26 जुलाई 2019 के केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) का आदेश रद्द करने का अनुरोध किया गया था। बोर्ड ने अपने आदेश में कहा था कि मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) की ओर से तय मुआवजा राशि पर मिलने वाले ब्याज पर लगाया गया कर उचित और तर्कसंगत है।

सीबीडीटी ने इस मुद्दे से संबंधित प्रतिवेदन रद्द करते हुए अपने आदेश में कहा था कि इस तरह का ब्याज आमदनी की श्रेणी में आता है।

क्रेडिट : पेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
फोटो क्रेडिट : Wikimedia commons

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