उज्बेकिस्तान लागत घटाने के लिए भारत से इस्पात आयात करने का इच्छुक

नयी दिल्ली, चारों तरफ जमीनी सीमा से घिरा मध्य एशियाई देश उज्बेकिस्तान भारत से इस्पात आयात करने का इच्छुक है। इसके लिए छोटा वैकल्पिक मार्ग अपनाने से ढुलाई लागत में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। एक उद्योग अधिकारी ने मंगलवार को यह बात कही।

उज्बेकिस्तान चीन से टीएमटी सरिया समेत सालाना करीब 10 लाख टन इस्पात का आयात करता है। चीन से समुद्री मार्ग के जरिये उज्बेकिस्तान तक इस्पात पहुंचाने की ढुलाई लागत वास्तविक इस्पात लागत के अलावा करीब 100 डॉलर प्रति टन तक बैठती है।

इस्पात उद्योग के अधिकारी ने कहा कि उज्बेकिस्तान छोटा वैकल्पिक मार्ग अपनाकर भारत से इस्पात आयात करना चाहता है। इससे उसकी ढुलाई लागत कम होगी। इस संबंध में उज्बेकिस्तान मेटलर्जी एसोसिएशन ने भारतीय इस्पात संघ (आईएसए) के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) भी किया है।

उन्होंने कहा ‘‘दोनों संघ विनिर्माण प्रौद्योगिकी पर्यावरण टिकाऊ वृद्धि और लॉजिस्टिक आदि क्षेत्रों में काम करेंगे तथा भारत एवं उज्बेकिस्तान के इस्पात उद्योगों के बीच आपसी समझ बढ़ाने के लिए संवाद को सुगम बनाएंगे।’’ यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकार भारतीय इस्पात कंपनियों को निर्यात बढ़ाने के लिए नए बाजारों में प्रवेश करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक है।

बाजार शोध कंपनी बिगमिंट के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल इस्पात निर्यात 91 लाख टन रहा। प्रमुख निर्यात क्षेत्रों में यूरोपीय संघ (ईयू) वियतनाम और पश्चिम एशिया शामिल रहे।

भारतीय इस्पात संघ इस्पात क्षेत्र के लिए नीतिगत मुद्दों पर काम करने वाला संगठन है। इसके सदस्यों में टाटा स्टील जेएसडब्ल्यू स्टील जिंदल स्टील और एएमएनएस इंडिया जैसे प्रमुख इस्पात उत्पादक शामिल हैं।क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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