शाहजहांपुर (उप्र), रामगंगा नदी पर यहां बने पांटून पुल को हर साल की तरह इसबार भी बरसात से पहले एहतियान हटाने से प्रदेश के तीन जिलों के करीब तीन लाख लोग प्रभावित होंगे। इस 115 मीटर पांटून पुल का इस्तेमाल शाहजहांपुर, बदायूं और फर्रुखाबाद के करीब तीन लाख लोग करते हैं और यह उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा है। अधिकारियों ने बताया कि आगामी बरसात के मौसम की वजह से एहतियातन इस पांटून पुल को हटाया जा रहा है।
अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) त्रिभुवन ने बताया पांटून का पुल एक अस्थायी व्यवस्था है और बरसात तथा बाढ़ का दौर खत्म होने के बाद नदियों पर पांटून पुल बनाए जाते हैं। इसी क्रम में कोलाघाट पर भी अस्थाई पांटून पुल बनाया गया है। इस पुल के हटने से लोगों को जिला मुख्यालय आने के लिए 100 किलोमीटर लंबा सफर तय करना पड़ेगा जबकि पहले उन्हें पाटून पुल के रास्ते महज 52 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती थी।
जिले में 2009 में दो नदियों पर बना कोलाघाट पुल, कलान तहसील के ग्रामीणों के आने जाने का एकमात्र साधन था। वर्ष 2021 में यह पुल क्षतिग्रस्त हो गया और लोग नाव के सहारे नदी पार करने लगे। ग्रामीणों के अनुरोध पर पांटून पुल की व्यवस्था कराई गई जिसे 15 जून के बाद हटा दिया जाता है। कलान के सब डिवीजन मजिस्ट्रेट (एसडीएम) दशरथ कुमार ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘ करीब तीन लोग इस पुल के हटाने से प्रभावित होंगे क्योंकि बदायूं, फर्रूखाबाद और शाहजहांपुर जिले के लोग इस पुल का इस्तेमाल करते हैं।’’
कलान नगर पंचायत के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि कलान तहसील के लोगों को शाहजहांपुर जिला मुख्यालय पहुंचने के लिए पहले 20 किलोमीटर की दूरी तय कर फर्रूखाबाद के अमृतपुर तहसील जाना होगा। कलान के नगर पंचायत अध्यक्ष हरिनारायण गुप्ता ने बताया कि पांटून पुल टूटने के बाद ग्रामीणों को मुख्यालय तक जाने के लिए चार जगह बस बदलनी पड़ेगी और 100 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जनपद न्यायालय आने वाले लोगों को चार से पांच घंटे का समय खर्च करना पड़ेगा। वहीं पांटून पुल से यह दूरी आधी रह जाती है।
जलालाबाद विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक हरि प्रकाश वर्मा ने बताया कि 2009 में बना पक्का पुल जांच में खराब स्थिति में पाया गया जिसमें कभी भी दुर्घटना होने की आशंका थी। विधायक ने बताया कि रामगंगा तथा बहुवुल नदी पर लगभग 1800 मीटर लंबा नया पुल का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है और उन्होंने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री से मिलने का समय मांगा है।
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता रतिन सिन्हा ने बताया कि कोलाघाट पुल का निर्माण 2009 में सेतु निगम द्वारा कराया गया था जिसका खंभा 2021 में क्षतिग्रस्त हो गया। इसके बाद विभाग ने पांटून पुल बनाया जिसे बरसात में हटा दिया जाता है। उन्होंने बताया कि पांटून पुल को 15-20 दिनों में हटा दिया जाएगा। मिर्जापुर कस्बे के शैलेंद्र पांडे दीपक का कहना है कि पांटून पुल हटने के बाद ग्रामीण जल्दी मुख्यालय पहुंचने के लिए नाव से नदी पार करते हैं और नाविक मनमाना किराया वसूलते हैं।
क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
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