एआईएडीएमके ने पार्टी कार्यकर्ताओं की भावनाओं के सम्मान में राजग छोड़ा, कोई दूसरा कारण नहीं: पलानीस्वामी

सलेम (तमिलनाडु), अखिल भारतीय अन्ना द्रमुक मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) के प्रमुख ई.के. पलानीस्वामी ने बुधवार को कहा कि उनकी पार्टी ने भाजपा नीत राजग से बाहर निकलने का निर्णय राज्य की ‘घटनाओं’ को लेकर अपने कार्यकर्ताओं की भावनाओं के सम्मान में लिया और इस गठजोड़ को तोड़ने का दूसरा कोई अन्य कारण नहीं है।

             मुख्यमंत्री ने यहां कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आलाकमान की ओर से काई दबाव नहीं था। उन्होंने मीडिया के एक धड़े की उन खबरों का भी खंडन किया जिसमें दावा किया गया है कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में सीट संबंधी भाजपा की मांग को लेकर दोनों दलों में मतभेद हो गया था।

             उन्होंने विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के गठन को ‘नाटक’ करार देते हुए कहा कि यह विरोधाभासी विचारों वाले दलों के एक साथ आने जैसा है और यह गुट आकार भी नहीं ले रहा है।  उन्होंने उदाहरण के तौर पर इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस (इंडिया) के एक प्रमुख घटक दल आम आदमी पार्टी (आप) का हवाला दिया जिसने साल के अंत में होने वाले मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की सूची जारी की है, जबकि वहां पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने हैं। एआईएडीएमके ने 25 सितंबर को पदाधिकारियों की बैठक में सर्वसम्मति से भाजपा को अलविदा कहने और 2024 में अपने स्वयं के समूह का नेतृत्व करने का फैसला किया।

             पलानीस्वामी ने उस बैठक को याद करते हुए कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से बाहर निकलने का निर्णय पार्टी के सदस्यों द्वारा ‘दो करोड़ पार्टी कार्यकर्ताओं’ की भावनाओं से शीर्ष नेतृत्व को अवगत कराने के बाद लिया गया।  एआईएडीएमके महासचिव ने कहा, “यहां हुई घटनाओं ने हमारे पार्टी कार्यकर्ताओं को आहत किया है। एक पार्टी कार्यकर्ता को पार्टी की सफलता और उसके कल्याण के लिए काम करना होता है और हमारा निर्णय पार्टी कार्यकर्ताओं की भावनाओं के सम्मान में है।”      

             द्रविड़ नेता सीएन अन्नादुरई के बारे में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के. अन्नामलाई की टिप्पणियों पर पूर्व सहयोगी भाजपा के साथ जुबानी जंग के परिणामस्वरूप एआईएडीएमके राजग से बाहर हो गई। पलानीस्वामी ने जोर देकर कहा कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की ओर से किसी भी तरह का ‘कोई दबाव’ नहीं था – चाहे वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हों, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह हों या पार्टी के राष्ट्रीय प्रमुख जे पी नड्डा हों। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अन्नाद्रमुक ने अन्नामलाई को बदलने की मांग नहीं की है।

             द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) की ओर से राजग और एआईएडीएमके के बीच गठबंधन टूटने को ‘नाटक’ करार देने के जवाब में पलानीस्वामी ने कहा, ‘‘विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ नाटक है।‘‘  पलानीस्वामी ने कहा कि एक तरहम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कह रही हैं कि वहां कम्युनिस्टों के साथ कोई तालमेल नहीं है, तो केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन कहते हैं कि केरल में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) कांग्रेस से हाथ नहीं मिलाने जा रही है। उन्होंने कहा कि ऐसा ही मामला आप शासित पंजाब और दिल्ली में भी है।  पलानीस्वामी ने एआईएडीएमके के नेतृत्व में एक ‘बड़े गठबंधन’ का भरोसा जताते हुए वर्ष 2024 के आम चुनाव और वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने की बात कही। कर्नाटक के साथ कावेरी जल विवाद समेत कई मुद्दों को लेकर उन्होंने एमके स्टालिन नीत द्रमुक सरकार की अलोचना की।

             कोयंबटूर में मंगलवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से एआईएडीएमके के विधायकों की मुलाकात के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वे जनप्रतिनिधि के रूप में केवल अपना काम कर रहे थे।  

क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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