ईटानगर, मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने बृहस्पतिवार को कहा कि अरुणाचल प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम (एपीएफआरए) 1978 के तहत बनायी गयी नयी नियमावली का उद्देश्य किसी धार्मिक समुदाय को निशाना बनाना नहीं है बल्कि धर्म से इतर लोगों की स्वदेशी संस्कृति और मान्यताओं की रक्षा करना है। खांडू ने राज्य स्थापना दिवस समारोह में अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि यह नियमावली उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद बनायी गयी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैसे तो यह कानून पहले से ही पिछले 46 साल से अस्तित्व में था लेकिन उसकी औपचारिक नियमावली नहीं थी और इस कमी को अब दूर किया जा रहा है।
खांडू ने कहा ‘‘नयी नियमावली के पीछे का मकसद किसी विशिष्ट धार्मिक समूह को लक्षित करना नहीं है चाहे वह बौद्ध हिंदू ईसाई या मुस्लिम हों बल्कि इसका उद्देश्य राज्य के मूल निवासियों को अधिक से अधिक सहायता प्रदान करना है।’’यह कानून शुरू में पूर्व मुख्यमंत्री पी के थुंगन के कार्यकाल के दौरान बनाया गया था जिसका उद्देश्य प्रलोभन या धोखाधड़ी के माध्यम से जबरन धर्म परिवर्तन को रोकना है। इस कानून के उल्लंघन पर दो साल तक की कैद और 10 000 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
सरकार द्वारा संतुलित और समावेशी दृष्टिकोण सुनिश्चित करने का आश्वासन देते हुए खांडू ने कहा ‘‘सरकार चर्चा के लिए तैयार है और इसी के अनुसार अरुणाचल प्रदेश के गृह मंत्री मामा नटुंग को किसी भी संगठन के साथ बातचीत करने और उनकी शंकाओं को दूर करने का काम सौंपा गया है। तदनुसार पहली बैठक शुक्रवार को अरुणाचल क्रिश्चियन फोरम के साथ होगी।’’
अरुणाचल क्रिश्चियन फोरम (एसीएफ) इस कानून का विरोध कर रहा है। उसने इसे ‘असंवैधानिक’ करार दिया तथा इसे निरस्त करने की मांग को लेकर 17 फरवरी को भूख हड़ताल की थी। अपनी सरकार की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए खांडू ने घोषणा की कि अगले दस वर्षों में राज्य को मुफ्त बिजली और बिजली परियोजनाओं में इक्विटी शेयरों से 10 000 करोड़ रुपये का वार्षिक राजस्व प्राप्त होने की उम्मीद है।क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडियाफोटो क्रेडिट : Wikimedia common