नयी दिल्ली, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के संकाय संघ (फेम्स) ने डॉ. ए. के. बिसोई को कार्डियो थोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी (सीटीवीएस) विभाग के प्रमुख के पद पर तुरंत बहाल करने की मांग की है। संघ ने एक नर्स द्वारा उन पर लगाए गए उत्पीड़न के आरोप के बाद उन्हें पद से हटाने में प्रक्रियागत खामियों का हवाला दिया है।
फेम्स ने चेतावनी दी है कि अगर उनका निष्कासन वापस नहीं लिया गया तो वह शुक्रवार को बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करेगा और शनिवार को सामूहिक आकस्मिक अवकाश लिया जाएगा।
एम्स नर्स यूनियन ने एम्स निदेशक और प्रधानमंत्री कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई है जिसमें डॉ. बिसोई पर कार्यस्थल पर महिला कर्मचारियों को धमकाने परेशान करने और बार-बार ‘‘अश्लील गैर-पेशेवर तथा अपमानजनक भाषा’’ के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया है।
इसके बाद 11 अक्टूबर को डॉ. बिसोई को पद से हटा दिया गया।एम्स प्रशासन ने सीटीवीएस विभाग का प्रभार तत्काल प्रभाव से वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. वी. देवगौरू को सौंप दिया। गत 11 अक्टूबर को जारी एम्स के एक ज्ञापन में कहा गया ‘‘सीटीवीएस विभाग की एक महिला नर्सिंग अधिकारी द्वारा सीटीवीएस के प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष डॉ. ए. के. बिसोई के खिलाफ दिनांक 30.09.2025 को प्राप्त शिकायत और एम्स नर्स यूनियन द्वारा दिनांक 30.09.2025 04.10.2025 और 07.10.2025 को प्राप्त अभ्यावेदन के मद्देनजर निदेशक ने सीटीवीएस विभागाध्यक्ष का प्रभार तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक सीटीवीएस के प्रोफेसर डॉ. वी. देवगौरू को सौंप दिया है।’’
फेम्स ने कहा कि डॉ. बिसोई को अपना बचाव करने का कोई मौका नहीं दिया गया और यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। उसने दावा किया कि नर्स की शिकायत जो पहले ही आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) को भेजी जा चुकी थी को नर्स यूनियन के साथ साझा करना ‘‘अधिकार से परे सक्रियता’’ को दर्शाता है।
एसोसिएशन ने यह भी कहा कि नर्स यूनियन द्वारा विरोध प्रदर्शन की धमकी प्रशासन पर संस्थागत ईमानदारी से समझौता करने का अनुचित दबाव है।
उसने उल्लेख किया कि एनआईएस सीटीसी में तैनात नर्सिंग स्टाफ ने 30 सितंबर को डॉ. बिसोई द्वारा उनके खिलाफ इस्तेमाल की गई अनुचित भाषा का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने सीटी2 सीसीयू में स्थानांतरण की मांग की थी। फेम्स ने नर्स यूनियन के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की भी मांग की जिसमें वर्तमान पदाधिकारियों का निलंबन भविष्य के चुनावों में उनकी भागीदारी पर प्रतिबंध और यूनियन पर प्रतिबंध लगाने पर विचार करना शामिल है।
उसने नर्सिंग अधिकारी को उनके मूल पद पर स्थानांतरित करने की मांग की और कहा कि आईसीसी को उनकी शिकायत की पूरी तरह से योग्यता के आधार पर बाहरी या यूनियन के प्रभाव से मुक्त होकर जांच करनी चाहिए। उसने जनसंपर्क अधिकारी से यह भी स्पष्टीकरण मांगा कि शिकायत को यौन उत्पीड़न के रूप में गलत तरीके से क्यों प्रस्तुत किया गया जबकि मामला केवल अनुचित भाषा और स्थानांतरण के अनुरोध का था।
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