कम वैश्विक कीमतें, स्थानीय उत्पादन में कमी से इस सत्र में कपास निर्यात प्रभावित होगा: सीएआई

मुंबई, कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएआई) ने कहा कि सस्ते ब्राजीलियाई कपास और कम घरेलू उत्पादन से चालू 2024-25 सत्र के दौरान पिछले साल की तुलना में निर्यात घटकर 15 लाख गांठ रहने की संभावना है। सीएआई ने एक बयान में कहा कि उसने वर्ष 2024-25 सत्र (अक्टूबर-सितंबर) के लिए 15 लाख गांठ कपास निर्यात होने का अनुमान लगाया है जो पिछले सत्र के 28.36 लाख गांठ से 13.36 लाख गांठ कम है।

सीएआई के अध्यक्ष अतुल एस गनात्रा ने पीटीआई-भाषा को बताया ‘‘अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्राजील का कपास सस्ता होने के कारण हमारे निर्यात में कमी आई है। ब्राजील का कपास भारत की उपज कीमत से सात प्रतिशत सस्ता है। इसके अलावा हमारा उत्पादन भी पिछले सत्र से 11 प्रतिशत कम है जिसके परिणामस्वरूप आयात में वृद्धि हुई है।’’

वर्ष 2024-25 के लिए कपास का आयात 33 लाख गांठ होने की उम्मीद है जो पिछले वर्ष की तुलना में 17.80 लाख गांठ अधिक है। वर्ष 2024-25 सीजन के लिए कुल कपास उत्पादन 291.35 लाख गांठ होने का अनुमान है जबकि पिछले सत्र में 327.45 लाख गांठ का उत्पादन हुआ था।

इसके अलावा सीएआई ने अप्रैल 2025 के अंत तक 185 लाख गांठ कपास की खपत का अनुमान लगाया है जबकि 30 अप्रैल 2025 तक निर्यात खेप 10 लाख गांठ होने का अनुमान है। अप्रैल 2025 के अंत में स्टॉक 130.89 लाख गांठ होने का अनुमान है जिसमें कपड़ा मिलों के पास 35 लाख गांठ और कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) महाराष्ट्र फेडरेशन और अन्य (एमएनसी व्यापारी जिनर निर्यातक अन्य) के पास शेष 95.89 लाख गांठ हैं।

सीएआई ने कपास सत्र 2024-25 के अंत तक अपनी कुल कपास आपूर्ति 354.54 लाख गांठ होने का अनुमान लगाया है।क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडियाफोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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