नयी दिल्ली, दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र से ऋण वसूली न्यायाधिकरण (डीआरटी) में तत्काल व्यवस्था के तहत ‘प्राथमिकता’ के आधार पर अधीनस्थ न्यायपालिका से एक न्यायिक सदस्य की नियुक्ति पर विचार करने को कहा है। अदालत ने कहा कि डीआरटी में इन रिक्त पदों पर नियुक्ति तक केंद्र इस पर विचार कर सकता है।
उच्च न्यायालय ने कहा कि इस तथ्य पर विचार करते हुए कि वर्तमान में दिल्ली में किसी भी डीआरटी में कोई न्यायिक सदस्य नहीं है और यहां तक कि ऋण वसूली अपीलीय न्यायाधिकरण (डीआरएटी) भी नेतृत्वहीन है, सरकार को इस विकल्प पर प्राथमिकता के आधार पर सोचना चाहिए।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने कहा, ‘‘हमने सरकारी वकील रवि प्रकाश के समक्ष यह विकल्प रखा है कि चयन प्रक्रिया के अनुरूप इन रिक्त पदों पर नियुक्तियां होने तक वित्त मंत्रालय के तहत वित्तीय सेवा विभाग उच्च न्यायालय से अधीनस्थ न्यायालय से एक न्यायिक सदस्य की नियुक्त का अनुरोध कर सकता है।’’
पीठ ने कहा, ‘‘इस बारे में पुराने उदाहरण भी हैं। हालांकि, पूर्व में इन पदों के लिए विज्ञापन निकाला गया था और अधीनस्थ न्यायपालिका से एक न्यायिक सदस्य ने डीआरटी में प्रतिनियुक्ति के लिए आवेदन किया था।’’
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