कोलकाता में दुर्गा पूजा पंडाल ने महिषासुर की पारंपरिक मूर्ति को कोरोनसुरा में परिवर्तित किया

कोरोनावायरस के यौद्धाओं के संधर्ष को उजागर करने के लिए कोलकाता के एक लोकप्रिय दुर्गा पूजा पंडाल ने महिषासुर की पारंपरिक मूर्ति को कोरोनसुरा में परिवर्तित कर दिया।

यूथ एसोसिएशन आफ मोहम्मद अली पार्क ने अपने 52वें दुर्गा पूजा उत्सव में वायरस से सुरक्षित रहने का एक संदेश देने के लिए पुलिस और डाक्टर की मूर्तियों का इस्तेमाल किया है। यह लोकप्रिय पूजा 1969 में ताराचंद दत्ता स्ट्रीट से शुरू की गई थी लेकिन इसकी बढ़ती लोकप्रियता के कारण इसे एम डी अली पार्क में स्थानांतरित कर दिया गया।

इस उत्सव के जरिए उन्होंने संदेश दिया कि अभी हम वायरस से पूरी तरह से मुक्त नहीं हुए है ‘जब तक वैक्सीन नही तब तक लापरवाही नहीं वाला फार्मूला अपनाना ही होगा। हमारा उद्देश्य लोगों को मास्क पहनने और सामाजिक दूरियों के मानंदडों को बनाए रखने के लिए जागरूक करना है।

इस मूर्ति को कारीगर कुश बेरा ने अपने दो बच्चों के साथ मिलकर जून 2020 से शुरू किया था। इसकी लंबाई करीब 12 फीट और मिट्टी से बनाई गई है। इसमें कोई सजावट नहीं की गई है। राज्य में आज से पांच दिवसीय दुर्गा पूजा उत्सव शुरू हो रहा है। कोविड-19 के नियमों का पालन करते हुए आयोजकों ने पहले ही पंडाल के प्रवेश द्वार से 10 मीटर की दूरी पर एक अवरोधक लगा दिया है ताकि इसमें कोई नियमों की अवहेलना न कर सके।

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