गंभीर का दबदबा और सूर्यकुमार की आजादी बनाती है भारत के लिए शानदार मिश्रण

नयी दिल्ली,  राहुल द्रविड़ के भारतीय टीम के मुख्य कोच के तौर पर अपने शानदार और बेहद सफल कार्यकाल को खत्म करने के तुरंत बाद रोहित शर्मा ने अपने इंस्टाग्राम पर एक भावुक पोस्ट लिखा था जिसके एक वाक्य ने कोच-कप्तान के रिश्ते को पूरी तरह से बयां कर दिया। रोहित ने लिखा  ‘‘मेरी पत्नी (रितिका सजदेह) आपको मेरी ‘वर्क वाइफ’ कहती है और मैं खुशकिस्मत हूं कि मैं भी आपको ऐसा कह पाता हूं।’’

                         जो लोग रोहित को जानते हैं वे इस बात की पुष्टि करेंगे कि वह कभी भी बिना सोचे-समझे बात नहीं करते और उन्होंने हर शब्द सोच-समझकर कहा था जब उन्होंने कप्तान-कोच के रिश्ते की तुलना शादी से की  जहां दो लोगों की सोच एक जैसी होनी चाहिए और उन्हें एक ही धुन पर चलना चाहिए।

                         भारत 72 घंटे से भी कम समय में टी20 विश्व कप में अपना खिताब बचाने के अभियान की शुरुआत करेगा तो सूर्यकुमार यादव और गौतम गंभीर के काम के रिश्ते पर नजर डालना बनता है जो कम से कम नतीजों के हिसाब से तो शानदार रहा है — 39 मैच में 31 जीत और जीत का प्रतिशत 79.48 ।

                        भारतीय क्रिकेट में अधिकतर सफल कप्तानों के लिए कोच हमेशा दूसरे नंबर पर रहे हैं।  खेल की गहरी समझ रखने वाले पूर्व कोच रवि शास्त्री हमेशा इस बात पर जोर देते थे कि यह विराट कोहली की टीम है और कप्तान ही इसका जनरल है।

                        जॉन राइट-सौरव गांगुली  गैरी कर्स्टन-महेंद्र सिंह धोनी और द्रविड़-रोहित के मामले में भी ऐसा ही था  जहां कप्तान ही टीम का असली ‘बॉस’ था। टी20 प्रारूप में सबसे तेजी से बदलाव हुए हैं और इसी वजह से फुटबॉल-मैनेजर शैली की कोचिंग की जरूरत पड़ी है जो गंभीर के स्वभाव के अनुसार बिल्कुल सही है।

                        और गंभीर की रणनीति को जरूरी आकार देने के लिए सूर्यकुमार की जरूरत थी  एक ऐसा व्यस्ति जिसे अपने कौशल पर पूरा भरोसा हो और जो अपनी काबिलियत के बारे में जानता हो ताकि उन्हें पूरी तरह से लागू कर सके।                      

                         लेकिन पिछले एक साल में  ऐसे कई उदाहरण मिले हैं जो बताते हैं कि गंभीर ‘प्लान’ बनाने वाले हैं और सूर्या उसे लागू करने वाले हैं।

                         बेशक दोनों के बीच एक अच्छा इतिहास है क्योंकि खिलाड़ी के तौर पर सूर्यकुमार ने पहली बार सुर्खियां तब बटोरी जब उन्होंने गंभीर की कप्तानी में कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए फिनिशर की भूमिका निभाई और उनका अब मशहूर नाम ‘स्काई’ असल में उन्हें मौजूदा मुख्य कोच ने ही दिया था।

                         भारतीय क्रिकेट में यह एक खुला राज है कि 2024 में तब के नए मुख्य कोच का सूर्यकुमार को हार्दिक पंड्या पर तरजीह देते हुए टी20 कप्तान का पद दिलाने में बहुत बड़ा हाथ था।

                        निजी तौर पर गंभीर और सूर्यकुमार बिल्कुल अलग हैं और अक्सर यह टीम के लिए अच्छा होता है। गंभीर दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर के एक बहुत अमीर व्यावसायिक परिवार से हैं जबकि सूर्यकुमार मुंबई के चेंबूर के एक मध्यमवर्ग के परिवार से हैं।

                         लेकिन अलग सामाजिक-आर्थिक ढांचे के बावजूद उनके बीच बहुत सी एक जैसी बातें देखी जा सकती हैं।           सूर्या के मामले में उनकी प्रतिभा के बावजूद एक नए खिलाड़ी की अकड़ की वजह से ही वह राज्य क्रिकेट संघ के साथ उलझ गए।

                        गंभीर के मामले में  उनके कभी करीबी दोस्त नहीं थे। वह हमेशा  आओ  अपना काम करो और घर जाओ  ऐसी मानसिकता वाले थे। वह अच्छी तरह जानते थे कि वह वीरेंद्र सहवाग जितने सक्षम नहीं थे और उन्हें टीम में जगह बनाने के लिए दोगुनी मेहनत करनी पड़ी।

                        बाएं हाथ के इस बल्लेबाज के राज्य क्रिकेट संघ के साथ झगड़े भी हुए। हालांकि सूर्यकुमार और गंभीर दोनों ही पक्के राष्ट्रवादी हैं और अपने चरित्र के इस पहलू को खुलकर दिखाते हैं।

क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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