नयी दिल्ली, गुजरात में स्थित भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा घास का मैदान और देश में चीतों के पुनर्वास से लिए चुने गए 10 स्थलों में से एक ‘बन्नी ग्रासलैंड’ चीतों के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
गुजरात के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) जयपाल सिंह ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि चीतों के लिए एक प्रजनन केंद्र स्थापित किया गया है और उनके शिकार की व्यवस्था करने के लिए चीतल व सांभर की आबादी को और बढ़ाने के प्रयास जारी हैं।
उन्होंने कहा हम संगरोध और बाड़ों समेत हर लिहाज से तैयार हैं। हालांकि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण और चीता परियोजना संचालन समिति यह तय करेगी कि उन्हें यहां कब लाया जाएगा। सिंह ने कहा कि 600 हेक्टेयर का बाड़ा तैयार किया गया है शाकाहारी जानवरों की संख्या बढ़ाई गई है तथा सीसीटीवी निगरानी व एक समर्पित पशु चिकित्सा केंद्र जैसी सुविधाएं स्थापित की गई हैं। चीतों के बाड़ों में अन्य बड़े मांसाहारी पशुओं की घुसपैठ रोकने के लिए बाड़ लगाई गई है।
उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान में पशु चिकित्सकों को भी प्रशिक्षित किया गया है जहां अफ्रीका से लाए गए चीतों को रखा गया है। बन्नी ग्रासलैंड की परिस्थितियां चीतों के लिए अनुकूल हैं और ये अफ्रीका के घास के मैदान सवाना और झाड़ीदार भूमि जैसी हैं। जामनगर में स्थित रिलायंस फाउंडेशन की सुविधा वंतारा ने ‘इंस्टाग्राम’ पर पोस्ट किया कि उसने गुजरात वन विभाग के सहयोग से बन्नी ग्रासलैंड में चित्तीदार हिरणों की संख्या बढ़ाई है।
बयान में कहा गया है चित्तीदार हिरणों को शामिल करना बन्नी में पारिस्थितिक संतुलन बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। एक प्रतिबद्ध भागीदार के रूप में वंतारा भारत की प्राकृतिक विरासत की रक्षा के लिए सरकार के साथ मिलकर काम करते हुए वैज्ञानिक विशेषज्ञता पशु चिकित्सा देखभाल और तकनीकी सहायता प्रदान कर रहा है।”
अधिकारियों ने बताया कि चीतों को बन्नी ग्रासलैंड में भेजे जाने से पहले मध्य प्रदेश के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में लाए जाने की संभावना है। राज्य सरकार ने सितंबर 2023 में आधिकारिक तौर पर वीरांगना दुर्गावती को बाघ अभयारण्य घोषित किया। यह भोपाल से लगभग 20 किलोमीटर दूर 2 339 वर्ग किलोमीटर में फैला है और नरसिंहपुर सागर व दमोह जिलों के कुछ हिस्सों इसके दायरे में आते हैं। एनटीसीए की एक टीम ने जून में बाघ अभयारण्य की तैयारियों की समीक्षा की थी।
अधिकारियों ने बताया कि इसके बाद चीतों को गुजरात के कच्छ जिले के बन्नी ग्रासलैंड और फिर राजस्थान के जैसलमेर जिले के शाहगढ़ बल्गे क्षेत्र में लाया जाएगा। चीता लाने के लिए कार्ययोजना में सूचीबद्ध 10 संभावित स्थल हैं: छत्तीसगढ़ में गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान गुजरात में बन्नी घास के मैदान मध्य प्रदेश में डुबरी वन्यजीव अभयारण्य संजय राष्ट्रीय उद्यान बागदरा वन्यजीव अभयारण्य नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य (अब वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व) और कुनो राष्ट्रीय उद्यान राजस्थान में डेजर्ट राष्ट्रीय उद्यान तथा शाहगढ़ घास के मैदान और उत्तर प्रदेश में कैमूर वन्यजीव अभयारण्य।
भारत में चीतों के विलुप्त होने के 70 वर्ष बाद सरकार ने देश में चीतों की स्थायी आबादी बसाने के लिए प्रोजेक्ट चीता शुरू किया था।इसके तहत कुनो राष्ट्रीय उद्यान में 20 अफ्रीकी चीते लाए गए। आठ चीते सितंबर 2022 में नामीबिया से और 12 चीते फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से लाए गए थे। इन 20 में से 11चीते जीवित हैं जिनमें से दो चीतों को अप्रैल में गांधी सागर अभयारण्य में स्थानांतरित कर दिया गया था। अफ्रीकी चीतों के आगमन के बाद से भारत में 26 शावक पैदा हुए हैं जिनमें से 17 जीवित हैं।
क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
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