चौहान ने कीटनाशकों-उर्वरकों की गुणवत्ता जांचने के लिए उपकरण के आविष्कार का आह्वान किया

  भोपाल,  केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों के लिए कीटनाशकों और उर्वरकों की गुणवत्ता जांचने के लिए उपकरणों का आविष्कार किया जाना चाहिए। यहां भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर) के 12वें दीक्षांत समारोह में चौहान ने कहा कि कीटनाशकों और उर्वरकों की जांच के लिए किसानों के पास एक परीक्षण सुविधा की आवश्यकता है।

             उन्होंने स्नातकों को संबोधित करते हुए कहा  ‘‘मैं इस्तेमाल हो रहे नकली कीटनाशकों और खाद को पकड़ने के काम में लगा हूं।’’  उन्होंने उनसे एक ऐसा उपकरण बनाने का आग्रह किया जो कीटनाशकों और उर्वरकों की गुणवत्ता की जांच कर सके और नकली कीटनाशकों की पहचान कर सके।

             चौहान ने कहा कि कृषि मंत्री बनने के बाद उन्होंने पाया कि कृषि उपज बढ़ाने के दावे के साथ 30 हजार जैव-उत्तेजक बेचे जा रहे हैं। उन्होंने कहा  ‘‘मैंने उनके दावे का वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर परीक्षण करवाने के बारे में सोचा। मैंने उनकी बिक्री के लिए एक निश्चित प्रोटोकॉल अपनाया। कंपनियों ने एक साल का समय मांगा  यह कहते हुए कि अगर सभी दवाइयां बंद कर दीं गईं  तो किसानों का क्या होगा  उसके बाद  उन्होंने एक और साल मांगा  लेकिन उन्हें सिर्फ तीन महीने दिए गए। मैं चाहता हूं कि इस दावे का परीक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान या प्रतिष्ठित कृषि विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिकों द्वारा किया जाए।’’

             उन्होंने बताया कि 22 हजार कंपनियों ने अपने उत्पाद परीक्षण के लिए नहीं सौंपे। उन्होंने आगे कहा कि बाद में परीक्षणों से पता चला कि केवल 642 उत्पादों ने ही कृषि उपज को बढ़ावा दिया।

             उन्होंने छात्रों से भारत में ही रहकर 2047 तक देश को एक विकसित राष्ट्र बनाने में मदद करने का आह्वान किया। चौहान ने खेती को लाभदायक बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि देश में जमीन की जोत पश्चिमी देशों की तुलना में छोटी है। पश्चिम देशों में कृषि भूमि विशाल है।

             उन्होंने कहा   हमारे छोटे किसानों के पास औसतन एक से दो एकड़ ज़मीन है। हमें उनकी आय बढ़ाने के लिए मत्स्य पालन और मुर्गी पालन जैसी एकीकृत खेती को बढ़ावा देना होगा।

क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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