नयी दिल्ली, कांग्रेस के पूर्व नेता सज्जन कुमार ने दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि विशेष जांच दल (एसआईटी) ने 1984 के सिख विरोधी दंगे और हत्या के एक मामले में उन्हें मिली जमानत को रद्द करने की अपील का कोई कारण नहीं बताया है।
पूर्व कांग्रेस नेता, तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए दंगों से संबंधित हत्या के एक अन्य मामले में पहले से ही आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। कुमार की ओर से पेश अधिवक्ता अनिल शर्मा ने कहा कि एसआईटी ने निचली अदालत के जमानत आदेश को चुनौती देते हुए कोई कारण और आधार नहीं दिया है।
उन्होंने कहा कि पिछले मामले में भी दोषी ठहराने और सजा सुनाए जाने के बाद वह मुकदमे के दौरान जमानत पर रहे।
अधिवक्ता ने कहा, “निचली अदालत के जमानत आदेश में कोई कमी नहीं है।” वहीं, केंद्र सरकार के स्थायी वकील अजय दिगपॉल के माध्यम से दंगों के मामलों की जांच करने वाली एसआईटी ने बताया कि कुमार एक जघन्य अपराध में शामिल थे और अभी कुछ महत्वपूर्ण गवाहों की जांच की जानी बाकी है और अगर उन्हें रिहा किया जाता है, तो इससे सबूतों को नुकसान पहुंचाया जा सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि कुमार पहले से ही इसी तरह के मामले में दोषी हैं और हिरासत में हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जमानत देते समय, निचली अदालत ने उच्चतम न्यायालय द्वारा पूर्व में की गई टिप्पणियों को नजरअंदाज कर दिया था, जिसने कुमार की अंतरिम जमानत याचिका को चिकित्सा आधार पर भी अनुमति नहीं दी। न्यायमूर्ति दिनेश कुमार शर्मा ने बताया कि इस मामले पर अगली सुनवाई 18 जुलाई को होगी। उन्होंने कहा, “हम इसे उस दिन (18 जुलाई) देखेंगे।”
गौरतलब है कि उच्च न्यायालय ने पिछले साल चार जुलाई को कुमार को जमानत देने के आदेश पर रोक लगा दी थी और उन्हें नोटिस जारी किया था।
क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
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