नयी दिल्ली, सकल माल एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह सितंबर में सालाना आधार पर 14.7 प्रतिशत बढ़कर 2.03 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। घरेलू खपत और आयात से होने वाले राजस्व में मजबूत वृद्धि के कारण जीएसटी संग्रह बढ़ा है। सरकार के आंकड़ों से यह जानकारी मिली।
हालांकि सितंबर में जीएसटी ‘रिफंड’ तीन प्रतिशत घटकर 27 001 करोड़ रुपये रहा। रिफंड को समायोजित करने के बाद सितंबर में शुद्ध जीएसटी संग्रह 18.1 प्रतिशत बढ़कर 1.76 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा।
घरेलू गतिविधियों से सकल जीएसटी संग्रह 10.1 प्रतिशत बढ़कर करीब 1.38 लाख करोड़ रुपये जबकि आयात से प्राप्त राजस्व 26 प्रतिशत बढ़कर 65 525 करोड़ रुपये रहा।
चालू वित्त वर्ष में यह तीसरा महीना है जब सकल जीएसटी संग्रह दो लाख करोड़ रुपये के पार रहा है। इससे पहले अप्रैल में जीएसटी संग्रह करीब 2.43 लाख करोड़ रुपये और जुलाई में 2.11 लाख करोड़ रुपये से अधिक के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था।
वित्त वर्ष की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में सकल जीएसटी संग्रह 11.6 प्रतिशत बढ़कर 12.46 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। इस दौरान शुद्ध संग्रह 10.4 प्रतिशत बढ़कर 10.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया।
ईवाई इंडिया के कर भागीदार सौरभ अग्रवाल ने कहा कि सकल जीएसटी संग्रह का दो लाख करोड़ रुपये के स्तर को पार करना और इसमें करीब 15 प्रतिशत की वृद्धि से पता चलता है कि वैश्विक दबाव के बावजूद घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि कर संग्रह में वृद्धि व्यापक रही है। उत्तर प्रदेश तेलंगाना गुजरात और कर्नाटक में संग्रह 16 से 18 प्रतिशत तक बढ़ा है। असम मणिपुर अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है जो देशभर में व्यापक आर्थिक विकास का संकेत देती है।
टैक्स कनेक्ट एडवाइजरी सर्विसेज एलएलपी के भागीदार विवेक जालान ने कहा ‘‘जीएसटी संग्रह में वृद्धि विनिर्माण और खपत की मजबूती को दर्शाती है। हालांकि रिफंड में कमी से यह संकेत मिलता है कि विभाग संभवत: भुगतान रोक रहा है। कारोबारियों के पास नकदी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए इस पर नजर रखने की जरूरत है।’’
उन्होंने कहा ‘‘जीएसटी 2.0 के तहत दरों में बड़ी कटौती के बावजूद संग्रह मजबूत बना हुआ है। हालांकि सितंबर 2026 की वृद्धि के एक हिस्से पर तुलनात्मक रूप से कमजोर आधार का असर भी है। सितंबर 2025 में जीएसटी 2.0 की घोषणा और अधिसूचना के बीच के अंतर के कारण कारोबार प्रभावित हुआ था।’’ जालान ने कहा कि जीएसटी दरों के युक्तिकरण की घोषणा तीन सितंबर 2025 को हुई थी और इसे 22 सितंबर 2025 से लागू किया गया। इसके कारण उपभोक्ताओं ने दरों में कटौती और उसके परिणामस्वरूप कीमतों में कमी लागू होने तक खरीदारी टाल दी थी। उन्होंने यह भी कहा कि अब जीएसटी परिषद अगले चरण के सुधारों पर ध्यान दे सकती है। जीएसटी परिषद की बैठक सात अक्टूबर को होने वाली है।
ग्रांट थॉर्नटन भारत के भागीदार और कर विवाद प्रबंधन प्रमुख मनोज मिश्रा ने कहा कि सितंबर में आयात से जुड़े जीएसटी में 25.9 प्रतिशत की तेज वृद्धि जबकि घरेलू जीएसटी में करीब 10 प्रतिशत की वृद्धि मुद्रा विनिमय दर जिंस कीमतों और आयात गतिविधियों के संयुक्त प्रभाव को बताती है।
उन्होंने कहा कि रुपये में गिरावट से डॉलर मूल्य में आयात का रुपये में मूल्य बढ़ा है। वहीं कच्चे तेल और अन्य जिंसों की ऊंची कीमतों से कुल आयात बिल और इसके साथ जीएसटी का आधार बढ़ा है।
मिश्रा ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स मशीनरी सोना और उर्वरक जैसी अधिक मूल्य वाली वस्तुओं के मजबूत आयात ने भी आयात आधारित जीएसटी संग्रह को बढ़ाया है। हालांकि आने वाले महीनों में वैश्विक जिंस कीमतों रुपये की विनिमय दर और आयात की मात्रा पर वृद्धि निर्भर करेगी।
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