तीसरा एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट ‘मंगरोल’ भारतीय नौसेना को सौंपा गया

कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL), कोच्चि द्वारा बनाया गया तीसरा एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट ‘मंगरोल’, 21 अगस्त 2026 को भारतीय नौसेना को सौंपा गया।

इस जहाज में 80 प्रतिशत से ज़्यादा स्वदेशी पुर्जे और तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। यह जहाज पानी के नीचे निगरानी, तटीय इलाकों में एंटी-सबमरीन वॉरफेयर (ASW) ऑपरेशन, कम तीव्रता वाले समुद्री ऑपरेशन (LIMO) और माइन वॉरफेयर (बारूदी सुरंगों से जुड़ी लड़ाई) की क्षमताओं से लैस है। यह जहाज वॉटरजेट से चलता है और इसमें अत्याधुनिक टॉरपीडो, एंटी-सबमरीन रॉकेट के साथ-साथ एडवांस्ड रडार और सोनार लगे हैं।’

मंगरोल’ का नाम गुजरात के जूनागढ़ ज़िले में स्थित तटीय शहर और छोटे बंदरगाह ‘मंगरोल’ से लिया गया है, जो समुद्री मछली पकड़ने के उद्योग के लिए एक प्रमुख बंदरगाह है। यह जहाज़ पुराने INS मंगरोल की विरासत को भी आगे बढ़ाता है, जो एक भारतीय नौसेना माइनस्वीपर था और 2004 तक सेवा में रहा; इस तरह यह खास युद्धपोतों के नामों को बनाए रखने की नौसेना की परंपरा को जारी रखता है।

मंगरोल की डिलीवरी भारतीय नौसेना की स्वदेशी जहाज़ निर्माण यात्रा में एक और मील का पत्थर है और सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विज़न की पुष्टि करती है। यह जहाज़ स्वदेशी रक्षा निर्माण इकोसिस्टम की बढ़ती ताकत का सबूत है।https://x.com/indiannavy/status/2091059121856598210/photo/1

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