तुर्किये: अंताक्या शहर के अवशेष समृद्ध अतीत की कहानी बयां करते

अंताक्या (तुर्किये), मेहमत इस्मेत करीब दो सप्ताह तक अंताक्या की सर्वाधिक लोकप्रिय ऐतिहासिक मस्जिद के खंडहर में रहे, जो तबाह हो चुके शहर की की कभी पहचान हुआ करती थी। यह शहर हजारों सालों से सभ्यताओं के मिलन बिंदु के रूप में मशहूर रहा तथा ईसाई, मुस्लिम एवं यहूदी लोग इसका सम्मान करते थे।

             तुर्किये और सीरिया में छह फरवरी को आए 7.8 तीव्रता के भूकंप में हजारों लोगों की मौत के बाद 74 वर्षीय बुजुर्ग ने हबीब नज्जर मस्जिद में शरण ली। वह मस्जिद के बचे रह गये कुछ मेहराबों के नीचे सोये और दुआ की।

             वह अपने अतीत के लिए विख्यात शहर के भविष्य को लेकर शोक मना रहे हैं। अंताक्या करीब-करीब पूरी तरह नष्ट हो चुका है और ज्यादातर शहर मलबे में बदल गया है। जो कुछ अभी बचा है, उसमें रहना बहुत असुरक्षित है। करीब-करीब हर व्यक्ति यहां से जा चुका है।

             सोमवार को आए 6.4 तीव्रता वाले भूकंप के नये झटके का केंद्र हेते प्रांत में था, जहां अंताक्या स्थित है। इस झटके ने एक बार फिर लोगों की जान ली और 200 से अधिक लोग घायल हो गये, जबकि कुछ और इमारतें धाराशायी हो गईं। कुछ जगह लोग फंस भी गये।

             मस्जिद के नष्ट होने की तरफ इंगित करते हुए इस्मेत ने कहा, ‘‘ इसे फिर से निर्मित किया जा सकता है, लेकिन यह पुरानी जैसी नहीं होगी।’’ उन्होंने कहा कि पुरानी वाली तो चली गई, अब केवल नाम रह गया है।

             अंताक्या को प्राचीन समय में एंटिओक के नाम से जाना जाता था और यह कई बार भूकंप से नष्ट हुआ, लेकिन बाद में इसका पुनर्निर्माण किया गया।

             लेकिन यहां के निवासियों को डर है कि इस बार उबरने में अधिक समय लगेगा और हो सकता है कि इस अनोखी ऐतिहासिक पहचान का कभी भी पुनरुद्धार नहीं हो सके।

             एंटिओक की स्थापना 300 ईसा पूर्व में सिकंदर के एक सेनापति ने ओरोंटिस नदी घाटी में की थी, जो ग्रीक-रोमन जगत का एक बड़ा केंद्र था। बताया जाता है कि सेंट पीटर और पॉल ने यहां एक प्राचीन ईसाई समुदाय की स्थापना की थी। यहीं पर पहली बार शब्द ‘क्रिश्चियन’ की उत्पत्ति हुई।

             इसके बाद इसने मुस्लिम और ईसाई आक्रमणकारियों के ध्यान को आकर्षित किया। आस्थाओं का मिलन इस शहर की विशेषता है।

क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया
फोटो क्रेडिट : Wikimedia commons

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