दिल्ली उच्च न्यायालय ने ऐप-आधारित एग्रीगेटर्स के माध्यम से बुक किए गए ऑटो रिक्शा पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लगाने की सरकारी अधिसूचना को बरकरार रखा है।
जस्टिस मनमोहन और मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ ने कहा कि ई-कॉमर्स ऑपरेटरों के वर्गीकरण को क़ानून द्वारा मान्यता प्राप्त होने के बाद से चुनौती के तहत अधिसूचनाओं में भेदभाव नहीं होता है।
कोर्ट ने तर्क दिया, “सेवा प्रदाताओं के एक वर्ग के रूप में वर्गीकरण को अधिनियम के प्रावधानों में अलग और अलग माना जाता है। इस वर्गीकरण का उद्देश्य प्राप्त करने की मांग के साथ एक तर्कसंगत संबंध है।”
सरकारी अधिसूचना को उबर इंडिया ने चुनौती दी थी।