दिल्ली मास्टर प्लान 2047 में पार्कों, जंगलों, बायोडायवर्सिटी पार्कों, बावड़ियों, ग्रीन सड़कों और इकोलॉजिकल कॉरिडोर को जोड़ने वाले “ग्रीन कनेक्ट” नेटवर्क का प्रस्ताव है। इसमें ज़्यादा संसाधन खर्च करने वाली सजावटी लैंडस्केपिंग और बड़े लॉन के बजाय, ऐसे ग्रीन स्पेस बनाने पर ज़ोर दिया गया है जो पर्यावरण के लिहाज़ से मज़बूत हों। इनमें पेड़ों की घनी छांव, स्थानीय प्राकृतिक आवासों की बहाली, देसी पेड़-पौधों की प्रजातियां और प्रकृति पर आधारित समाधान शामिल हों।
MPD-2047 के अनुसार, दिल्ली का लगभग 22 प्रतिशत हिस्सा अभी हरे-भरे क्षेत्र (ग्रीन कवर) के अंतर्गत आता है। यह योजना जंगलों, जैव-विविधता पार्कों, शहरी हरियाली और इकोलॉजिकल कॉरिडोर के माध्यम से इस नेटवर्क को मजबूत और विविध बनाने का प्रयास करती है।
इसका एक मुख्य हिस्सा ‘इंटीग्रेटेड ग्रीन-ब्लू इंफ्रास्ट्रक्चर’ दृष्टिकोण है, जो दिल्ली रिज से यमुना तक फैला हुआ है। इसमें नजफगढ़, ट्रांस-यमुना और बारापुल्ला ड्रेनेज बेसिन में यमुना के बाढ़-मैदानों, प्राकृतिक और कृत्रिम नालों, वेटलैंड्स, झीलों और अन्य जल निकायों के संरक्षण और पुनरुद्धार का प्रावधान है।
यह योजना हाइड्रोलॉजिकल कार्यों को बेहतर बनाने और इकोलॉजिकल कॉरिडोर को बहाल करने के लिए प्रकृति-आधारित और जैविक बहाली उपायों का प्रस्ताव करती है। कैनोपी कवर (पेड़ों के फैलाव) को बढ़ाने और सार्वजनिक स्थानों के साथ ग्रीन और ब्लू संपत्तियों को एकीकृत करने का उद्देश्य शहरी ‘हीट-आइलैंड’ प्रभाव को कम करना और जलवायु परिवर्तन के प्रति दिल्ली की क्षमता को मजबूत करना भी है।
MPD-2047 पर्यावरण सुधार को परिवहन नीति से भी जोड़ता है। यह सार्वजनिक परिवहन, पैदल चलने और साइकिल चलाने के अधिक उपयोग की परिकल्पना करता है और चार्जिंग व री-फ्यूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ इलेक्ट्रिक, हाइड्रोजन और अन्य कम-उत्सर्जन वाली परिवहन तकनीकों को बढ़ावा देता है। योजना का कहना है कि यह बदलाव उत्सर्जन को कम करने और दिल्ली की पर्यावरणीय गुणवत्ता में सुधार करने में मदद करेगा।