मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में, दिल्ली सरकार ने 1 नवंबर से ‘विंटर एक्शन प्लान 2026-27’ लागू करके वायु प्रदूषण से निपटने के अपने प्रयासों को तेज कर दिया है। इसे लागू करने के पहले दिन, अधिकारियों ने 14,930 वाहनों की जांच की, दिल्ली की सीमाओं पर 1,539 वाहनों को वापस लौटा दिया, ‘पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट’ (PUCC) न होने पर 566 चालान काटे और 300 निर्माण व विध्वंस स्थलों का निरीक्षण किया। प्रदूषण नियंत्रण के विभिन्न उपायों के तहत कुल 68.4 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
दिल्ली सरकार के पर्यावरण एवं वन विभाग द्वारा जारी दैनिक कार्रवाई रिपोर्ट के अनुसार, इन उपायों को परिवहन विभाग, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस, नगर निगम (MCD), दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) और निर्माण एजेंसियों द्वारा संयुक्त रूप से लागू किया जा रहा है।
‘भारत स्टेज VI’ (BS-VI) उत्सर्जन मानकों से नीचे के, दिल्ली के बाहर के वाहनों के प्रवेश पर लगी पाबंदियों के तहत, प्रवर्तन टीमों ने दिल्ली के प्रवेश बिंदुओं पर 14,930 वाहनों की जांच की। इनमें से दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने 11,595 वाहनों की, जबकि परिवहन विभाग की टीमों ने 3,335 वाहनों की जांच की।
प्रवेश संबंधी नियमों का उल्लंघन करने या दिल्ली से होकर न गुजरने वाले (non-destined) कुल 1,539 वाहनों को वापस लौटा दिया गया। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने 1,426 वाहनों को, जबकि परिवहन विभाग की टीमों ने 113 वाहनों को वापस भेजा। प्रवर्तन एजेंसियों ने 127 चालान काटे और नियमों के तहत 62 वाहनों को जब्त (impound) किया। सीमा पर प्रवेश नियमों के उल्लंघन के लिए 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
रिपोर्ट में बताया गया है कि छूट प्राप्त 740 वाहनों—जिनमें CNG से चलने वाले, इलेक्ट्रिक और आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहन शामिल हैं—की जांच की गई और उन्हें दिल्ली में प्रवेश करने की अनुमति दी गई।
सरकार ने अनिवार्य PUCC नियमों के पालन को भी सख्त किया है, और जिनके पास वैध प्रमाण पत्र नहीं हैं, उन वाहनों को ईंधन देने पर भी रोक लगाई है। कुल 566 PUCC चालान काटे गए, जिनमें से 493 दिल्ली ट्रैफिक पुलिस द्वारा और 73 परिवहन विभाग की प्रवर्तन टीमों द्वारा जारी किए गए। इन पर कुल 56.6 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया, जिसमें दिल्ली ट्रैफिक पुलिस द्वारा 49.3 लाख रुपये और परिवहन विभाग द्वारा 7.3 लाख रुपये का जुर्माना शामिल है।
‘विंटर एक्शन प्लान’ के पहले चरण के तहत, धूल उड़ाने वाले विध्वंस (demolition) कार्यों और बाहरी निर्माण गतिविधियों पर लगे प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की गई।
प्रवर्तन टीमों ने दिल्ली भर में 300 निर्माण और विध्वंस स्थलों का निरीक्षण किया और नियमों का उल्लंघन करने वाले 33 स्थलों की पहचान की। अधिकारियों ने 17 स्थलों को बंद करने के निर्देश दिए और 19 ‘शो-कॉज’ नोटिस जारी किए। इसके अलावा, 9.8 लाख रुपये का पर्यावरण मुआवजा भी लगाया गया।
निरीक्षण किए गए 300 स्थलों में से 91 बड़े निर्माण स्थल थे (जिनका क्षेत्रफल 500 वर्ग मीटर या उससे अधिक था), जबकि 209 छोटे स्थल थे। नियमों का उल्लंघन 16 बड़े स्थलों और 17 छोटे स्थलों पर पाया गया। बड़े स्थलों पर 4 लाख रुपये और छोटे स्थलों पर 5.8 लाख रुपये का पर्यावरण मुआवजा लगाया गया। रिपोर्ट में बताया गया है कि यह प्रवर्तन कार्रवाई ‘पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986’ की धारा 5 और दिल्ली सरकार के ‘विंटर एक्शन प्लान’ के तहत जारी निर्देशों के अनुसार की गई है।
सरकार ने बताया कि सभी 12 सीमा गलियारों (बॉर्डर कॉरिडोर) में चौबीसों घंटे संयुक्त गश्त जारी है, जबकि निर्माण कार्यों वाले प्रमुख स्थानों (हॉटस्पॉट) पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) को रोज़ाना अनुपालन रिपोर्ट भी सौंपी जा रही हैं।
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि सरकारी टीमें वाहनों के प्रवेश पर लगी पाबंदियों को लागू कर रही हैं, प्रदूषण प्रमाणपत्रों की जांच कर रही हैं और निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल के खिलाफ कार्रवाई कर रही हैं। पहले दिन की कार्रवाई के आंकड़ों का जिक्र करते हुए, सिरसा ने बताया कि 14,930 वाहनों की जांच की गई, PUCC (प्रदूषण प्रमाणपत्र) न होने पर 566 चालान काटे गए और 300 निर्माण स्थलों का निरीक्षण किया गया।
सिरसा ने वाहन मालिकों से अपील की कि वे अपने पास वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र रखें, प्रवेश संबंधी पाबंदियों का पालन करें और धूल नियंत्रण के निर्धारित नियमों का पालन करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए सामूहिक भागीदारी की आवश्यकता है।
इस बीच, मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण वाले प्रमुख स्थानों (हॉटस्पॉट) पर 1,150 ‘मिस्ट स्प्रेयर’ (धूल दबाने वाली मशीनें) तैनात की जा रही हैं, ताकि हवा में उड़ने वाली धूल को कम किया जा सके और धूल प्रदूषण को घटाया जा सके।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा कि ‘विंटर एक्शन प्लान 2026–27’ (शीतकालीन कार्य योजना) में प्रदूषण पर अधिक कड़े नियंत्रण, सख्ती से नियमों का पालन और लगातार निगरानी शामिल होगी। उन्होंने दिल्ली के निवासियों से दिशानिर्देशों का पालन करने और राष्ट्रीय राजधानी की वायु गुणवत्ता में सुधार लाने में योगदान देने की अपील की।