दिवाली और छठ मनाने घर जा रहे बिहार के लोग विस चुनाव के बाद लौटेंगे मणिपुर

इंफाल, मणिपुर में रह रहे बिहार के कई प्रवासी कामगार और कारोबारी दिवाली और छठ मनाने के लिए अपने मूल राज्य गए हैं और वहां होने वाले विधानसभा चुनावों में वोट डालने के बाद ही लौटने की योजना बना रहे हैं। जो लोग अब भी पूर्वोत्तर राज्य में हैं वे भी चुनाव में मतदान करना चाहते हैं लेकिन यात्रा की ऊंची लागत उनके लिए बाधा है।

बिहार के पूर्वी चंपारण निवासी और इंफाल में कपड़ों की दुकान चलाने वाले सुनील महतो ने कहा ‘‘हमारे कई दोस्त और सहकर्मी दशहरा दिवाली और छठ त्योहारों के लिए बिहार में अपने-अपने घर जा चुके हैं और वोट डालने के बाद लौटेंगे।’’ पिछले 32 साल से मणिपुर में रह रहे महतो (53) ने कहा ‘‘सोशल मीडिया के माध्यम से हम इस बात की जानकारी रख रहे हैं कि हमारे प्रदेश में क्या हो रहा है। हम भारतीय जनता पार्टी को वोट दे रहे हैं।’’

बिहार के आरा के एक अन्य व्यवसायी परियत प्रसाद ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा ‘‘मेरी पत्नी और बच्चे अभी घर पर हैं। चुनाव के बाद वे भी लौट आएंगे।’’ प्रसाद ने साथ ही बताया कि इंफाल के दो सबसे बड़े बाजारों थंगल और पाओना बाजार में रहने वाले बिहार के कई लोगों ने यात्रा के महंगा होने के कारण मतदान नहीं करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा ‘‘हमें इंफाल से कोलकाता या गुवाहाटी तक विमान से जाना पड़ता है और फिर ट्रेन से जाना पड़ता है। हवाई यात्रा का एक व्यक्ति का आने-जाने का खर्च 30 000 रुपये से अधिक है जो कई दिहाड़ी मजदूरों के लिए वहन करने योग्य नहीं है।’’ प्रसाद ने कहा ‘‘राष्ट्रीय राजमार्गों के माध्यम से यात्रा करने में बहुत अधिक समय लगता है और यह असुविधाजनक है। आर्थिक बोझ को देखते हुए हममें से कई लोगों ने मतदान नहीं करने का फैसला किया है। जीविकोपार्जन और भविष्य के लिए बचत अधिक आवश्यक है।’’ उन्होंने यह भी कहा कि मणिपुर में रहने वाले बिहार के लोग संगठित नहीं है और निर्णय व्यक्तिगत स्तर पर लिए जाते हैं। हालांकि कोई आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं लेकिन माना जाता है कि राज्य में बिहार और अन्य राज्यों के प्रवासियों की आबादी 1.5 लाख से अधिक है। अन्य राज्यों के प्रवासियों को मणिपुर में प्रवेश करने के लिए इनर लाइन परमिट प्राप्त करना आवश्यक है।

इंफाल के तेलीपाटी इलाके में तेली समुदाय से संबंधित एक संगठन के सदस्य दीपक प्रसाद ने आगामी बिहार चुनावों पर टिप्पणी करते हुए दावा किया ‘‘हिंदुओं के विपरीत जो आमतौर पर राजनीतिक रूप से अधिक सक्रिय नहीं होते मुसलमान आमतौर पर सामूहिक रूप से वोट देने जाते हैं। वे बिहार जायेंगे वोट डालेंगे और वापस लौट जायेंगे।’’

मुजफ्फरपुर के मूल निवासी महूब आलम ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा ‘‘मेरे कुछ बिहारी सहकर्मी अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में ट्रेन से घर जाने की योजना बना रहे हैं। मैं नहीं जा रहा हूं क्योंकि यात्रा हमारे लिए महंगी है।’’ महबूब वर्तमान में इंफाल के मंत्रिपुखरी इलाके में किराए के मकान में रहते हैं और एक कपड़े की दुकान पर काम करते हैं।

प्रसाद ने कहा कि तेली समुदाय के कई सदस्य पीढ़ियों से मणिपुर में रह रहे हैं और बिहार की तुलना में राज्य के सांस्कृतिक और राजनीतिक जीवन में अधिक घुले-मिले हैं। उन्होंने कहा ‘‘हम बिहार की तुलना में मणिपुर में घर जैसा अधिक महसूस करते हैं।’’क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडियाफोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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