जोहानिसबर्ग, भारत के सर्वदलीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने यहां 350 से अधिक प्रवासियों और स्थानीय भारतीयों को संबोधित किया तथा पाकिस्तान को आतंकवाद का प्रायोजक बताया। इस दौरान ‘आतंकवाद को कतई बर्दाश्त न करने’ के भारत के रुख की सराहना की गई। मंगलवार शाम जोहानिसबर्ग पहुंचने के लगभग दो घंटे बाद आयोजित कार्यक्रम में प्रतिनिधिमंडल ने दक्षिण अफ्रीका में भारतीय नागरिकों और स्थानीय समुदाय से वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ भारत की बेबाक लड़ाई में शामिल होने का आह्वान किया।
राकांपा-एसपी की सांसद सुप्रिया सुले के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल उन सात सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडलों में से एक है जिन्हें भारत ने 33 वैश्विक राजधानियों का दौरा करने का दायित्व सौंपा है ताकि वे पाकिस्तान की मंशा और आतंकवाद के प्रति भारत के रुख के बारे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अवगत करा सकें।
प्रतिनिधिमंडल के प्रत्येक सदस्य ने पहलगाम हमले के बारे में जानकारी साझा की तथा उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का भी ब्योरा दिया जिसके तहत पाकिस्तान और इसके कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाया गया जिसमें विभिन्न समूहों से संबंधित 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए।
सुले ने कहा ‘‘जब प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में शपथ ली थी तो उन्होंने अपने शपथग्रहण समारोह में हर पड़ोसी को आमंत्रित किया था ताकि यह संदेश दिया जा सके कि हम चाहते हैं कि उपमहाद्वीप शांतिपूर्ण और खुशहाल हो तथा सब एक साथ आगे बढ़ें। लेकिन दुर्भाग्य से पहलगाम की घटना के कारण ऐसा नहीं हुआ। इस घटना ने दुनिया भर में हर भारतीय को झकझोर दिया है। मुझे खुशी है कि दक्षिण अफ्रीका भारत के साथ खड़ा है।’’
दक्षिण अफ्रीका 22 अप्रैल के आतंकवादी हमले की निंदा करने वाले पहले देशों में से एक था। इस सप्ताह अपने प्रतिनिधिमंडल की चार देशों की यात्रा के औचित्य को स्पष्ट करते हुए सुले ने कहा कि पहलगाम आतंकवादी हमला ‘‘भारत की आत्मा पर हमला’’ था।
सुले ने कहा ‘‘इसलिए दुनिया को सच बताना होगा कि हम आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेंगे। भारत एक ऐसा देश है जिसने कभी युद्ध की पहल नहीं की है हम इस पर कायम हैं। हम शांति चाहते हैं लेकिन अपनी मेहनतकश मासूम आत्माओं को खोने की कीमत पर नहीं।’’
सुले के अलावा प्रतिनिधिमंडल में भाजपा नेता राजीव प्रताप रूडी अनुराग ठाकुर और वी मुरलीधरन कांग्रेस नेता मनीष तिवारी और आनंद शर्मा तेदेपा नेता लावु श्री कृष्ण देवरायलू आप नेता विक्रमजीत सिंह साहनी और पूर्व राजनयिक सैयद अकबरुद्दीन शामिल हैं।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के पूर्व स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने कहा ‘‘हम इसे हमारी सामाजिक एकता को कमजोर करने की कार्रवाई के रूप में देखते हैं। हम एक बहुलवादी देश हैं जिसकी पहचान विविधता है फिर भी हमने उस सामाजिक सहमति को कमजोर करने का प्रयास देखा।’’पूर्व विदेश राज्य मंत्री मुरलीधरन ने उपस्थित लोगों से आह्वान किया कि वे अपने परिचितों से संपर्क करें और आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहमति बनाने में भारत की मदद करें ताकि विश्व शांतिपूर्वक विकास कर सके।
ठाकुर ने कहा ‘‘पाकिस्तान दुनिया का एकमात्र देश है जहां संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सूची में आतंकवाद से संबद्ध जिन 52 संस्थाओं और व्यक्तियों के नाम हैं उन सभी का संबंध पाकिस्तान से है।’
’ साहनी ने उपस्थित लोगों से कहा कि महात्मा गांधी द्वारा अपनाई गई भारत की अहिंसा की नीति का जन्म दक्षिण अफ्रीका में युवा वकील के रूप में उनके कार्य करने के दौरान हुआ था जब उन्होंने नस्लीय भेदभाव के खिलाफ लड़ाई का नेतृत्व किया था।
कतर से आया यह प्रतिनिधिमंडल अगले दो दिन में केप टाउन जाएगा और वहां संसद में दक्षिण अफ्रीकी राजनीतिक नेताओं तथा वहां के नागरिक समाज से मुलाकात करेगा। इसके बाद यह इथियोपिया और मिस्र जाएगा।क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडियाफोटो क्रेडिट : Wikimedia common