धर्म पालन का अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था के हित में उचित प्रतिबंधों के अधीन है: अदालत

पटना, पटना उच्च न्यायालय ने कहा है कि धर्म को मानने और उसका पालन करने का अधिकार असीमित नहीं है और यह सार्वजनिक व्यवस्था और सामाजिक नियमों के हित में उचित पाबंदियों के अधीन है। अदालत ने यह टिप्पणी बिहार के सिवान में एक सालाना धार्मिक शोभायात्रा में 300 श्रद्धालुओं के शामिल होने की अनुमति मांगने वाली याचिका को खारिज करते हुए की जहां कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लोगों की संख्या सीमित कर दी गई थी।

याचिकाकर्ता ने अदालत से अधिकारियों को यह निर्देश देने का अनुरोध किया था कि हिंदू कैलेंडर के अनुसार भाद्रपद कृष्ण पक्ष के 11वें दिन आयोजित होने वाले स्थानीय मठ (अखाड़ा) की वार्षिक शोभा यात्रा को कम से कम 300 श्रद्धालुओं के साथ पारंपरिक रास्ते से निकलने की अनुमति दी जाए।

याचिका में दावा किया गया कि शामिल होने वाले लोगों की अनुमन्य संख्या को 2012 और 2013 में 200 से घटाकर 2014 में 150 वर्ष 2015 में 100 और अंततः 2023 और उसके बाद पांच कर दिया गया और पारंपरिक रास्ते में भी बदलाव किया गया था।

यह तर्क दिया गया कि प्रतिबंधों ने अनुच्छेद 25 के तहत श्रद्धालुओं के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया और पारंपरिक रास्ते को लेकर शांति भंग होने की कभी कोई शिकायत नहीं की गई थी। इस मामले में प्रतिवादी राज्य सरकार ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा उपाय के तौर पर प्रतिबंध लगाए गए थे।

पिछले फैसलों का हवाला देते हुए अदालत ने कहा ‘‘अनुच्छेद 25 और 26 धर्म की स्वतंत्रता की गारंटी देते हैं लेकिन ये सार्वजनिक व्यवस्था नैतिकता और स्वास्थ्य संबंधी पाबंदियों के अधीन हैं।’’क्रेडिट : प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया फोटो क्रेडिट : Wikimedia common

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